उमाकांत त्रिपाठी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 69वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से 10000 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। विद्यार्थी परिषद का यह राष्ट्रीय अधिवेशन 10 दिसंबर तक चलेगा। अधिवेशन में चित्रों के जरिये दिल्ली के इतिहास और छत्रपति शिवाजी के हिंदवी स्वराज को दिखाया गया। इसमें छात्रों द्वारा बनाईं कलाकृतियां प्रदर्शित की गई।शाह ने दिल्ली में बुराड़ी के डीडीए ग्राउंड में नवनिर्मित टेंट सिटी इंद्रप्रस्थ नगर में अमृत महोत्सव राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि देश के युवाओं का सुनहरा भविष्य इंतजार कर रहा है और पिछले 10 सालों में देश में बड़े बदलाव हुए हैं। पिछले 10 सालों में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जातिवाद की जगह विकास ने ले ली है। युवा देश की रीढ़ हैं और इसके विकास को गति देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का समय आ गया है और पूरी दुनिया विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए उसकी ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और विकास विरोधाभासी नहीं हैं।

देशभर से आए विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में आकर तीस साल खुद की उम्र कम महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैं आज यहां राष्ट्रीय अधिवेशन के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कितना गौरव महसूस कर रहा हूं, ये मैं आपको समझा नहीं पाऊंगा। ये अनुभव वही व्यक्ति कर सकता है, जिसकी शुरुआत राजकोट अधिवेशन में पंडाल के अंत में बैठकर हुई है और वो आज मुख्य अतिथि बनकर यहां खड़ा है।

शाह ने आगे कहा कि- मैं गौरवान्वित हूं कि मैं विद्यार्थी परिषद का एक ऑर्गेनिक प्रोडक्ट हूं। अमित शाह ने कहा कि मुझे चार दशक पहले का समय याद आ रहा है, जब मैं कार्यकर्ता के रूप में पिछली पंक्ति में बैठा करता था। चीन युद्ध के बाद पूर्वोत्तर को देश से जोड़े रखने का कार्य करने में परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण है। एबीवीपी वह मूर्ति है, जिसे यशवंतराव केलकर, मदनदास देवी, दत्ताजी डिडोलकर जैसे अनेकों महान शिल्पियों ने 75 वर्षों की इस यात्रा में गढ़ा है।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब भारत का समय आ गया है, दुनिया हमारी तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। एबीवीपी कार्यकर्ता ये संकल्प लें कि 2047 में भारत सर्वप्रथम होगा, ये आपकी जिम्मेदारी है। हमारी कई पीढ़ियां आजादी के संघर्ष में खप गईं, उनके सपनों का भारत बनाने की जिम्मेदारी युवाओं की है।

शाह ने कहा कि किसी को विश्वास नहीं था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो सकता है। एबीवीपी की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि इसने न केवल शिक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ संघर्ष किया है बल्कि छात्रों के चरित्र निर्माण में भी मदद की है। उन्होंने कहा कि देश के अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। लोगों को मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं। अनुच्छेद 370 खत्म, अब लाल चौक पर तिरंगा लहराने से कोई नहीं रोक सकता। पूर्वोत्तर में शांति की स्थापना पिछले 10 साल में पीएम मोदी की सरकार के कारण हुआ। एबीवीपी का रास्ता ज्ञान, शील, संकल्प का है और उसी रास्ते पर चलना है।














