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बिहार के किसानों की नई जुगाड़, अब खेती में होगा ड्रोन का इस्तेमाल; मिनटों में होगा घंटों का काम

खबर टीम इंडिया की। बिहार में किसानों की सहायता अब ड्रोन करेगा. किसान बेहतर फसल उत्पादन के लिए ड्रोन का उपयोग कर सकेंगे. किसानों के लिए ड्रोन दोस्त की भूमिका में होगा. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में ड्रोन का खेती में इस्तेमाल और इससे होने वाले फायदे के बारे में किसानों को बताया जा रहा है. जिले में पहले चरण में रामगढ़वा व तेतरिया प्रखंड का चयन किया गया है. यहां करीब 15 एकड़ खेती पर किसानों को ड्रोन के इस्तेमाल के तौर-तरीके बताए जा रहे हैं. इसके बाद दूसरे चरण में दूसरे प्रखंडो को ड्रोन चलाने के तौर तरीकों से अवगत कराया जाएगा.

मिनटों में होगा घंटों का काम
ड्रोन की मदद से 10 से 12 मिनट में किसान एक एकड़ में लगी फसल की बोआई, उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव कर पाएंगे. इससे खेती में लगने वाला समय और श्रम की बचत होगी. साथ ही फसल उत्पादन में भी किसानों की लागत कम होगी.
पहले सरसों मटर, बाद में गन्ने पर होगा इस्तेमाल जिले में ड्रोन की सहायता से किसानों के बीच सरसों, मटर और गेहूं के फसल की निगरानी के साथ खाद और कीटनाशक छिड़काव का डेमो किसानों के बीच दिया जा रहा है. ड्रोन के माध्यम से छिड़काव होने के कई फायदे हैं. एक तो किसान फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव के दौरान हानिकारक रसायनों के संपर्क में नहीं आएंगे तो वहीं ड्रोन से हवाई छिड़काव पांच गुना तेज होता है. किसान ड्रोन की सहायता से एक बार में दस लीटर उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव कर सकेंगे.

किस तरह काम करेगा ड्रोन
इसके साथ ही आरजीबी सेंसर और मल्टीस्पेक्ट्रल सेंसर वाले ड्रोन समस्याग्रस्त क्षेत्रों की सटीक पहचान और उपचार कर सकते हैं. ड्रोन एक बार फुल चार्ज होने के बाद 30 से 35 मिनट तक जबकि ज्यादा भार के साथ 15 मिनट तक लगातार हवा में उड़ कर छिड़काव कर सकता है.सरसों, मटर और गेहूं के बाद अब इसका इस्तेमाल गन्ना सहित दूसरे फसलों पर भी किया जाएगा.

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