पकिस्तान से चुनाव लड़ रही दो हिंदू-महिला उम्मीदवारों ने कहा काश;हमारा नेता भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी जैसा होता।

पकिस्तान से चुनाव लड़ रही दो हिंदू-महिला उम्मीदवारों ने कहा काश;हमारा नेता भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी जैसा होता।

उमाकांत त्रिपाठी।
पाकिस्तान में 8 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। इस बार चुनाव में यहां की 2 हिंदू महिलाएं भी मैदान में हैं। नाम है सविरा प्रकाश और राधा भील… प्रकाश पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, राधा राधा भील निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। राधा हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। इसी को लेकर दैनिक भास्कर ने पाकिस्तान में राधा भील और सविरा प्रकाश से संपर्क किया और उनसे बातचीत की। पढ़िए, दोनों से हुई बातचीत के अंश…

भील अनुसूचित जाति समुदाय से हैं राधा
बातचीत शुरू करने से पहले राधा भील के परिवार के बारे में जानते हैं। भारतीय सीमा से सटे थारपारकर इलाके की रहने वाली राधा भील अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। इस क्षेत्र में पाकिस्तानी हिंदुओं की बड़ी आबादी रहती है। राधा कहती हैं, ‘मैं गांव के एक साधारण परिवार से हूं।

लोगों की सेवा करने के साथ-साथ मैंने एक एनजीओ में भी काम किया है। परिवार में मेरा एक बेटा और एक बेटी है, बड़े बेटे का एक बेटा है और बेटी की 2 बेटियां हैं। इस तरह हमारा बड़ा परिवार है।’
किसान की बेटी कैसे बनी पॉलिटिशियन?
राधा से हमारा पहला सवाल था कि आपको राजनीति में आने का विचार कैसे आया? राधा कहती हैं, ‘यह मेरे खून में है। मेरे पिता भी एक कार्यकर्ता थे। जब मैं बच्ची था, तभी से लोग अपने सवाल लेकर मेरे घर आते थे। किसी के घर में झगड़ा हो गया हो, किसी की लड़की भाग गई हो या किसी के साथ छेड़छाड़ हुई हो, कोई भी मसला सुलझाने के लिए लोग मेरे पिता के घर आते थे।

चुनाव के समय भी नेता हमारे घर आते थे। मैं उन्हें सुनती थी।उसके बाद जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, इन गतिविधियों में शामिल होती चली गई। इसी बीच जब हमारे इलाके में एक भील की मौत हो गई तो सभी ने विरोध रैली निकाली और मैं भी उसमें शामिल हो गई। मैंने उस रैली में भाषण दिया और यहीं से एक कार्यकर्ता के रूप में मेरी यात्रा शुरू हुई। फिर मैं राजनीति में आ गई।ड़ी-बड़ी समस्याएं लेकर लोग मेरे पास आते हैं
राधा आगे कहती हैं कि यहां किसी की हत्या हो जाए, किसी की लड़की का अपहरण हो जाए, किसी से झगड़ा हो जाए या किसी तरह का अन्याय हो जाए तो अल्पसंख्यक लोग मेरे पास आते हैं। फिर मैं अपने एक्टिविस्ट ग्रुप के साथ उन लोगों की मदद करती हूं। मेरे पास हाल ही में एक मामला आया…

एक लड़की मेरे पास आई और बोली, ‘मेरी बहन की अभी कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी। शादी के 15 दिन बाद ही उसके पति की मौत हो गई थी। अब उसके ससुराल वाले उसकी शादी कहीं और तय कर रहे हैं। मेरी बहन दूसरी शादी के लिए राजी नहीं है। इसलिए ससुराल वाले उसे ज्यादातर समय बेहोश रखते हैं। जैसे ही उसे होश आता है, उसे फिर से बेहोश कर देते हैं। मैं यह केस भी उनका केस भी लड़ रही हूं।

‘यहां की राजनीति में महिलाएं तो बिल्कुल नहीं’
राधा पाकिस्तान की राजनीति की हकीकत बताते हुए कहती हैं- ‘यहां अल्पसंख्यकों के मुद्दे तो बहुत हैं, लेकिन उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। क्योंकि राजनीति में हमारे पास कोई पॉलिटिशियन नहीं है। अगर हमारा कोई नेता होगा तो ही वह हमारी समस्याएं सुनेगा!… यहां राजनीति में महिलाओं की बात करें तो उनकी संख्या न के बराबर है।
नियम बन गया है सरकार का कार्यकाल जेल में खत्म होना
वहीं, हिंदुओं में भी दरारें पड़ गई हैं। 5% हिंदू बहुत अमीर हैं और सरकार भी उनका ख्याल रखती है। लेकिन, 95% हिंदू अल्पसंख्यक हैं, जिनकी कोई सुनने वाला नहीं। गरीबों के पास वोट तो हैं, लेकिन पैसा नहीं। जो 5% हिंदू अमीर हैं, उनके पास वोट तो बहुत कम हैं लेकिन पैसा ज्यादा है। पार्टी टिकट देने से पहले सिर्फ पैसा देखती है।
यम बन गया है सरकार का कार्यकाल जेल में खत्म होना

पाकिस्तान में चुनावों के बारे में राधा कहती हैं- ‘चुनाव से पहले तो सभी नेता खूब बातें करते हैं, लेकिन जीतने के बाद कुछ काम नहीं होता। संसद में पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक ही चलती रहती है। इससे वहां कुछ काम नहीं होता। यदि सरकार गिर जाती है तो नेताओं को जेल में डाल दिया जाता है।
नवाज शरीफ की सरकार हटी तो उन्हें जेल में डाल दिया गया था। इसके बाद इमरान की सरकार हटी तो उन्हें जेल में डाल दिया गया। अभी यहां इतनी दिक्कतें चल रही हैं कि यह भी तय नहीं है कि 8 फरवरी को चुनाव होगा भी या नहीं।

दोनों देश एक होना चाहते हैं, लेकिन…
भारत-पाकिस्तान के बहुचर्चित और बिगड़ते रिश्तों पर राधा भील कहती हैं- दोनों देशों के नागरिकों का कहना है कि कभी लड़ाई नहीं होनी चाहिए और दोनों देश शांति से रहना चाहते हैं, लेकिन दोनों देशों की राजनीति ऐसा संभव नहीं होने देती।

पहले जब भारत-पाकिस्तान के बीच ट्रेन शुरू हुई थी तो कई पाकिस्तानी भारत आया-जाया करते थे। जब दोनों देशों के बीच आवाजाही शुरू हुई तो कुछ समय बाद ही ट्रेन ही बंद कर दी गई। राजनीति दोनों देशों को एक नहीं होने देती, जबकि लोग चाहते हैं कि दोनों देश मिलकर रहें।