NEET पेपर लीक: स्टूडेंट और पेरेंट्स से मिले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, बोले- जांच में नहीं बरती जाएगी कोताही

NEET पेपर लीक: स्टूडेंट और पेरेंट्स से मिले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, बोले- जांच में नहीं बरती जाएगी कोताही

उमाकांत त्रिपाठी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 14 जून को NEET UG पेपर लीक और इसकी CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि NTA दो हफ्तों के अंदर इस पर अपना पक्ष रखे। इस मामले पर 8 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। पिटीशनर हितेश सिंह कश्यप का आरोप है कि गुजरात के गोधरा में जय जल राम परीक्षा सेंटर को चुनने के लिए कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड आदि राज्यों में 26 छात्रों ने 10-10 लाख रुपए घूस दी थी। कश्यप ने कहा कि इस सेंटर पर ड्यूटी दे रहे टीचर सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार टीचर के पास से सभी 26 छात्रों की डीटेल मिली है। इसलिए इस मामले की CBI जांच जरूरी है।

क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
वहीं, कुछ स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। प्रधान ने भरोसा दिया कि जांच में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। सरकार पारदर्शी प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है। कोर्ट के सामने पारदर्शिता से बात रखेंगे। कोर्ट जो भी आदेश देगा, उसका पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि परीक्षा अच्छी हुई है, एक-दो जगह की घटना सामने आई है, इसकी इन्क्वायरी चल रही है। ये सब कोर्ट के संज्ञान में है। कोर्ट जो भी कहेगा, हम करेंगे। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हमने कुछ स्टूडेंट्स को बुलाया था, उनके पेरेंट्स से भी मिला। मैंने उनको आश्वस्त किया है कि सरकार पारदर्शी प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है। 24 लाख एप्लीकेंट्स थे, 23 लाख 33 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। स्टूडेंट्स की कुछ शंकाएं सामने आई थीं।

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर होगा केस?
प्रधान ने कहा कि 6 सेंटरों पर गड़बड़ियों बात भी सामने आई। ग्रेस मार्क्स को लेकर भी आपत्ति आई है। कल ही सुप्रीम कोर्ट ने 1500 से ज्यादा स्टूडेंट्स को दोबारा एग्जाम देने का बोल दिया है। NEET को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स में 41 पिटीशन लगी हैं। स्टूडेंट्स ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी समेत 7 राज्‍यों की हाईकोर्ट में NEET में गड़बड़‍ियों को लेकर याचिकाएं दायर की हैं। NTA ने कहा है कि अलग-अलग कोर्ट के अलग-अलग फैसला सुनाने से छात्रों में भ्रम फैल सकता है। इसलिए सभी मामले सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किए जाएं।