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कोयला से गैस निकालने को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राजस्व हिस्सेदारी में 50% छूट दी: जोशी

केंद्रीय कोयला, खान एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कोयला मंत्रालय ने कोयला गैसीकरण के लिए राजस्व साझाकरण में 50 प्रतिशत रियायत को स्वीकृति दे दी है। मुंबई में एक निवेशक सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भारत को ऊर्जा के लिहाज से स्वतंत्र बनाने में सहायता के लिए कोयले से हाइड्रोजन बनाने जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया है। इससे पहले जोशी ने राजस्व साझेदारी मॉडल पर कोल इंडिया लि. की बंद/ ठप हो चुकी खदानों का शुभारम्भ किया।

‘कोयला गैसीकरण- आगे की राह पर’ मुंबई में आयोजित निवेशक सम्मेलन को कोल इंडिया और फिक्की ने मिलकर आयोजित किया था। निवेशक सम्मेलन सह कार्यशाला का लक्ष्य कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहन देना और इस क्षेत्र में कारोबारी सुगमता सुनिश्चित करना है।

कोयला, खान एवं रेलवे राज्य मंत्री रावसाहेब पाटिल दानवे ने कहा, “कोयला गैसीकरण वक्त की आवश्यकता है और टिकाऊ भविष्य की ओर एक कदम है।” दानवे ने कहा कि सरकार का 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य है। इससे तकनीक और गैर तकनीक क्षेत्र दोनों में रोजगार का सृजन होगा।

कोयला गैसीकरण को कोयला जलाने की तुलना में स्वच्छ विकल्प माना जाता है। गैसीकरण से कोयले की रासायनिक विशेषताओं के उपयोग की सहूलियत मिलती है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उद्योग को ‘कोयला से हाइड्रोजन’ के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के दौरान जोशी ने कोयला मंत्रालय द्वारा तैयार ‘कोयले से हाइड्रोजन के लिए रोडमैप’ पर एक रिपोर्ट पेश की।

कार्यक्रम के दौरान कोयला गैसीकरण में उद्योग के विशेषज्ञों, परामर्शकों, शोधकर्ताओं और हितधारकों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एम. नागाराजू और सीआईएल चेयरमैन पराग अग्रवाल और उद्योग के अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए।

कोयला गैसीकरण को समर्थन और रियायती दर पर क्षेत्र को कोयला उपलब्ध कराने के क्रम में, कोयला मंत्रालय ने कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी के लिए राजस्व साझेदारी में 50 प्रतिशत रियायत के लिए एक नीति पेश की है। अगर सफल बोलीदाता निकाले गए कोयले का या तो अपने संयंत्र (या संयंत्रों) या अपनी होल्डिंग, सहायक कंपनियों, संबद्ध कंपनियों, एसोसिएट कंपनियों में कोयले के गैसीकरण या द्रवीकरण में उपयोग करती है या सालाना आधार पर कोयले के गैसीकरण या द्रवीकरण के लिए कोयले को बेचती है तो बोलीदाता रियायत का पात्र होगा। हालांकि, यह उस साल के लिए स्वीकृत खनन योजना के तहत निर्धारित कोयला उत्पादन का कम से 10 प्रति गैसीकरण या द्रवीकरण के लिए उपभोग करने या बेचने की शर्तों से बंधा रहेगा।

कोयले से बनाई गई सिन-गैस को बिजली उत्पादन के साथ ही हाइड्रोजन (सीसीयूएस के साथ नीली), वैकल्पिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी या मीथेन), डि-मिथाइल ईथर (डीएमई) जैसे गैसीय ईंधन, मेथेनॉल, एथेनॉल, सिंथेटिक डीजल जैसे तरल ईंधन और मेथेनॉल डेरिवेटिव्स, ओलेफिन्स, प्रोपिलीन, मोनो इथिलीन ग्लाइकोल (एमईजी) जैसे रसायन, अमोनिया, डीआरआई, औद्योगिक रसायनों सहित नाइट्रोजन उर्वरक बनाने में उपयोग किया जा सकता है। इन उत्पादों से आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने में सहायता मिलेगी।

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