मजबूत होंगे भारत-बांग्लादेश के संबंध: दोनों देशों के बीच हुए कई क्षेत्रों में समझौते, ये बोले पीएम मोदी

मजबूत होंगे भारत-बांग्लादेश के संबंध: दोनों देशों के बीच हुए कई क्षेत्रों में समझौते, ये बोले पीएम मोदी

उमाकांत त्रिपाठी।भारत और बांग्लादेश ने व्यापार, समुद्री सीमा सुरक्षा, डिजिटल आदान प्रदान समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का समझौता किया है. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना शुक्रवार से दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचीं. प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से मुलाकात की और अनेक मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता की. प्रधानमंत्री मोदी ने शेख हसीना का हैदराबाद हाउस में गर्मजोशी से स्वागत किया.शेख हसीना से मुलाकात और वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा डेवलपमेंट पार्टनर है. बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को हम विशेष तौर पर प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने कहा कि मैं बंगबंधु के स्थिर, समृद्ध और प्रगतिशील बांग्लादेश के विजन को साकार करने में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराता हूं.

 

जानिए किन-किन क्षेत्रों में हुआ समझौता?
1.बांग्लादेश के मेडिकल मरीजों के लिए ई-वीजा
2.बांग्लादेश के रंगपुर में भारत का नया सहायक उच्चायोग
3.राजशाही और कोलकाता के बीच नई ट्रेन सेवा
4.चटगांव और कोलकाता के बीच नई बस सेवा
5.गेडे-दर्शना और हल्दीबाड़ी-चिलाहाटी के बीच दलगांव तक मालगाड़ी सेवाओं की शुरुआत
6.अनुदान सहायता के तहत सिराजगंज में अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) का निर्माण
7.भारतीय ग्रिड के माध्यम से नेपाल से बांग्लादेश को 40 मेगावाट बिजली का निर्यात शुरू करना
8.गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर चर्चा के लिए संयुक्त तकनीकी समिति
9.बांग्लादेश के अंदर तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन पर परियोजना के लिए तकनीकी प्रतिनिधिमंडल का बांग्लादेश दौरा
10.बांग्लादेशी पुलिस अधिकारियों के लिए 350 प्रशिक्षण स्लॉट
11.मरीजों के लिए मुक्तिजोद्धा योजना

भारत और बांगलादेश के बीच डि़जिटल साझेदारी पर हुआ बड़ा समझौता
इसके अलावा भारत और बांग्लादेश में डि़जिटल साझेदारी के तहत समझौतों के आदान-प्रदान किए गए. भारत के विदेश सचिव और बांग्लादेश के विदेश सचिव ने डिजिटल सहयोग से जुड़े दस्तावेजों पर दस्तखत किए हैं. दोनों देशों में हरित भागीदारी पर भी समझौता किया गया है. वहीं दोनों देशों में समुद्री सहयोग और ब्लू इकोनोमी पर भी समझौते का आदान-प्रदान किया गया. इसका मकसद समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करना है.