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सोनम रघुवंशी पर नहीं लगी मर्डर की धारा, इस वजह से कोर्ट ने दी जमानत, क्या नहीं की थी राजा की हत्या?

खबर इंडिया की। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। करीब 11 महीने से जेल में बंद मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को शिलांग कोर्ट से जमानत मिल गई है। लेकिन इस जमानत के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने पूरे केस की जांच और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी से जुड़े जिन दस्तावेजों को पुलिस ने पेश किया, उनमें ऐसी कानूनी धारा का जिक्र था, जो भारतीय न्याय संहिता यानी BNS में अस्तित्व में ही नहीं रखती। पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो, निरीक्षण मेमो, अधिकार सूचना और केस डायरी में BNS की धारा 403(1) लिखी थी, जबकि अदालत ने साफ कहा कि ऐसी कोई धारा कानून में मौजूद ही नहीं है।

इतना ही नहीं, हत्या के जिस आरोप में सोनम को गिरफ्तार किया गया, उससे जुड़ी धारा 103(1) का भी गिरफ्तारी दस्तावेजों में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के समय यह बताना जरूरी होता है कि उसे किस अपराध और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। लेकिन इस मामले में मूल कानूनी प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया गया।

पुलिस ने अदालत में दलील दी कि यह सिर्फ क्लेरिकल एरर यानी लिपिकीय गलती थी। लेकिन अदालत ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ टाइपिंग मिस्टेक नहीं, बल्कि आरोपी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने साफ कहा कि जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी का सही आधार ही नहीं बताया जाएगा, तो वह अपना कानूनी बचाव कैसे करेगा?

अदालत ने यहां तक टिप्पणी की कि आरोपी को गिरफ्तारी के प्रभावी और वैध कारण नहीं बताए गए, इसलिए गिरफ्तारी प्रक्रिया ही अवैध मानी जा सकती है। कोर्ट ने एक और अहम सवाल उठाया कि ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे साबित हो सके कि सोनम को गिरफ्तारी के बाद वकील की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। जब उसे पहली बार गाजीपुर कोर्ट में पेश किया गया, तब भी यह स्पष्ट नहीं था कि उसे कानूनी सलाह लेने का पूरा अवसर मिला या नहीं।

हालांकि कोर्ट ने सोनम को जमानत दे दी है, लेकिन कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। अदालत की अनुमति के बिना वह शिलांग जिला छोड़कर कहीं नहीं जा सकेगी। माना जा रहा है कि जांच एजेंसियां अभी भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं।

वहीं इस फैसले के बाद मृतक राजा रघुवंशी के परिवार में भारी नाराजगी है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए बेहद दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां परिवार से साझा नहीं कीं, जिसका फायदा आरोपी पक्ष को मिला। उन्होंने कहा कि परिवार हाईकोर्ट में जाकर इस जमानत को चुनौती देगा।

राजा की मां उमा रघुवंशी ने भी अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें कानून पर भरोसा था, लेकिन अब उनका विश्वास टूट गया है। उमा रघुवंशी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में पैसों का खेल हुआ है और न्याय प्रभावित हुआ है। वहीं राजा के पिता अशोक रघुवंशी और भाई सचिन रघुवंशी ने भी न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए।

बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी सोनम से 11 मई को हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए थे। 23 मई को राजा अचानक लापता हो गए और 2 जून को उनका शव चेरापूंजी की एक गहरी खाई से बरामद हुआ। बाद में सोनम ने गाजीपुर में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने इस मामले में कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। अब कोर्ट के इस फैसले ने पूरे केस को एक नई दिशा दे दी है।

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