उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। आजाद भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में वह लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जिसे दशकों तक अटूट माना जाता रहा।
26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने लगातार कार्यकाल के 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 1952 के आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बने पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह उपलब्धि केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।
पंडित नेहरू ने आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रखी थी। उन्होंने संस्थानों को खड़ा किया और आधुनिक भारत की दिशा तय की। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले एक दशक में भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, जी-20 की सफल मेजबानी और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसी योजनाओं को उनकी सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में देखा जाता है।
हालांकि यह रिकॉर्ड केवल एक पड़ाव है। असली चुनौती अब शुरू होती है। मोदी सरकार का अगला लक्ष्य भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। सरकार का फोकस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, स्पेस टेक्नोलॉजी और डिजिटल गवर्नेंस पर है। ‘विकसित भारत 2047’ का विजन इसी दिशा में सबसे महत्वाकांक्षी अभियान माना जा रहा है।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में भारत जर्मनी और जापान जैसी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है। स्टार्टअप इकोसिस्टम से लेकर अंतरिक्ष क्षेत्र तक, भारत तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पीएम मोदी अपने इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को देश के आर्थिक और वैश्विक नेतृत्व में भी बदल पाएंगे?
फिलहाल एक बात तय है—भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जिसकी चर्चा आने वाले वर्षों तक होती रहेगी।














