खबर इंडिया की।त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ता नजर आ रहा है। Sugar Price Hike ने घरेलू खर्च की चिंता बढ़ा दी है। खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमत मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को बढ़कर करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये प्रति किलो रहा, जबकि एक दिन पहले यह 63.05 रुपये प्रति किलो था। खास बात यह है कि एक महीने पहले चीनी का औसत भाव 48.81 रुपये प्रति किलो था। यानी महज एक महीने में कीमत करीब 31 फीसदी बढ़ गई है।
चीनी के दाम में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब देश में त्योहारों की तैयारियां तेज होने लगी हैं। आने वाले महीनों में मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में Sugar Price Hike का असर सिर्फ घरों के बजट तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि मिठाई और खाद्य कारोबार की लागत पर भी पड़ सकता है।
एक महीने में 31% और सालभर में 38% महंगी हुई चीनी
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 25 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये प्रति किलो रहा। एक महीने पहले यानी करीब 48.81 रुपये प्रति किलो के मुकाबले यह लगभग 31 फीसदी ज्यादा है। वहीं, पिछले साल इसी अवधि में चीनी का औसत भाव 46.31 रुपये प्रति किलो था। इस लिहाज से सालाना आधार पर भी कीमत करीब 38 फीसदी अधिक है।
बाजार में कीमतों का अंतर भी काफी देखने को मिल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी का अधिकतम बिक्री मूल्य 76 रुपये प्रति किलो तक रहा, जबकि मॉडल रेट 65 रुपये प्रति किलो था। इसका मतलब है कि अलग-अलग इलाकों और बाजारों में उपभोक्ताओं को चीनी के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है।
थोक बाजार की स्थिति भी फिलहाल पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। सोमवार को चीनी का औसत थोक भाव 59.23 रुपये प्रति किलो था। एक महीने पहले यह 45.35 रुपये और एक साल पहले 43.01 रुपये प्रति किलो था। हालांकि, सरकार और उद्योग संगठनों के अनुसार मिल स्तर पर कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट आई है, लेकिन इसका फायदा अभी खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई नहीं दिया है।
सरकार के कदमों के बावजूद खुदरा बाजार में राहत क्यों नहीं?
Sugar Price Hike को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। DGFT की अधिसूचना के अनुसार, कच्ची चीनी के लिए 10 लाख मीट्रिक टन का टैरिफ रेट कोटा तय किया गया है और यह व्यवस्था 31 अक्टूबर 2026 तक लागू है।
सरकार का उद्देश्य साफ है कि घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचे, जिससे आपूर्ति बढ़े और कीमतों पर दबाव कम हो। हालांकि, आयातित चीनी को बाजार तक पहुंचने, प्रोसेसिंग और बिक्री की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसलिए थोक या मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट आने के बावजूद उसका असर खुदरा दुकानों तक तुरंत पहुंचना जरूरी नहीं है।
इसके अलावा सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है। देशभर में चीनी डीलरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा निर्धारित की गई है। केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं, ताकि कृत्रिम कमी पैदा करने या जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने की स्थिति की जांच की जा सके।
1 सितंबर से बड़े खरीदारों पर भी लागू होगा नया नियम
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को लेकर भी नया नियम बनाया है। 1 सितंबर 2026 से थोक या बड़े उपभोक्ता अपनी 15 दिनों की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इस श्रेणी में बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाले कारोबार, जैसे बेकरी और मिठाई उद्योग, प्रभावित हो सकते हैं।
सरकार का मानना है कि इस तरह की सीमा से बाजार में जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से पहले यदि व्यापारी और बड़े खरीदार बड़ी मात्रा में चीनी जमा करते हैं तो बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बन सकती है। स्टॉक लिमिट का उद्देश्य इसी जोखिम को कम करना है।
सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की तैयारी करने की सलाह भी दी है। सरकारी अनुमान के अनुसार, अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन की तुलना में 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो सकता है। इससे त्योहारों के दौरान घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चीनी की कीमत बढ़ने की वजह क्या है?
सरकार के मुताबिक, मौजूदा Sugar Price Hike के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। घरेलू उत्पादन अनुमान से कम रहने, त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, गन्ने की फसल को मौसम से नुकसान, वैश्विक बाजार में आपूर्ति की स्थिति और कुछ हिस्सों में सट्टेबाजी तथा जमाखोरी जैसे कई कारण बताए गए हैं।
मौजूदा सीजन में देश का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख मीट्रिक टन था। यानी उत्पादन अनुमान में उल्लेखनीय कमी आई है। दूसरी ओर भारत में घरेलू खपत भी काफी बड़ी है। सरकार के अनुसार देश में सामान्य तौर पर सालाना 320-340 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 लाख मीट्रिक टन रहती है।
वैश्विक बाजार का दबाव भी महत्वपूर्ण है। सरकार ने बताया है कि 2026-27 में वैश्विक चीनी बाजार में करीब 33 लाख टन का घाटा अनुमानित है। अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमत 30 जून को करीब 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई, यानी दो महीने से भी कम समय में 16 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई।
क्या त्योहारों तक चीनी सस्ती होगी?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार के कदमों से त्योहारों तक चीनी के दाम नीचे आएंगे। मिल स्तर पर कीमतों में हालिया गिरावट एक सकारात्मक संकेत जरूर है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले दिनों मिल भाव में करीब 18 फीसदी की कमी आई है और यह लगभग 55 रुपये प्रति किलो तक आया है। हालांकि, खुदरा बाजार में इसका असर पहुंचने में समय लग सकता है।
शुल्क-मुक्त आयात से अतिरिक्त आपूर्ति आने, स्टॉक लिमिट लागू होने और अक्टूबर में नई क्रशिंग शुरू होने के बाद बाजार में उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। अगर आपूर्ति मांग के मुकाबले पर्याप्त रहती है तो खुदरा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग कितनी बढ़ती है, यह भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए स्थिति यह है कि चीनी की कीमत पिछले महीने की तुलना में काफी ऊपर है और सरकार के उपायों का पूरा असर बाजार तक पहुंचना अभी बाकी है। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह चीनी बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।














