उमाकांत त्रिपाठी।Paper Leak Amendment Bill 2026 को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों को दिए गए आश्वासन के बाद सोमवार को केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश कर सकते हैं। इस संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक मामलों की जांच और सुनवाई को तेज करना तथा दोषियों को जल्द सजा दिलाना है।
सरकार का कहना है कि- Paper Leak Amendment Bill 2026 लागू होने के बाद परीक्षा माफिया के खिलाफ कार्रवाई पहले से अधिक तेज और प्रभावी होगी। इसके तहत विशेष जांच एजेंसी, समयबद्ध जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट और अपील के लिए भी निश्चित समय सीमा तय की गई है।
Paper Leak Amendment Bill 2026 में क्या होंगे बड़े बदलाव?
सरकार द्वारा तैयार किए गए संशोधन विधेयक में दो नई धाराएं 12A और 12B जोड़ी गई हैं। इन धाराओं के माध्यम से केंद्र सरकार को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार मिलेगा।
यदि किसी पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी जाती है, तो उसे दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य वर्षों तक लंबित रहने वाली जांच प्रक्रिया को समाप्त करना और दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकार का मानना है कि- समयबद्ध जांच से छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर और मजबूत होगा।
Fast Track Court में होगी रोजाना सुनवाई
Paper Leak Amendment Bill 2026 का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना है।
संशोधन के अनुसार, राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करेंगे।
इन अदालतों में पेपर लीक से जुड़े मामलों की रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों तक अदालतों में लंबित रहने वाले मामलों को तेजी से निपटाना है ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगे।
अपील के लिए भी तय होगी समय सीमा
संशोधन विधेयक में अपील की प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ संबंधित पक्ष हाई कोर्ट में अपील कर सकेगा। इस अपील की सुनवाई दो न्यायाधीशों की पीठ करेगी।
सरकार ने प्रयास किया है कि- हाई कोर्ट भी ऐसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करे।
फैसले के 30 दिनों के भीतर अपील करना अनिवार्य होगा। विशेष परिस्थितियों में यह समय सीमा बढ़ाकर 90 दिन तक की जा सकेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?
23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो संदेश जारी कर पेपर लीक पर अपनी चिंता व्यक्त की थी।
उन्होंने कहा कि- पेपर लीक कोई सामान्य विषय नहीं है बल्कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा मामला है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि- सरकार ने पिछले कुछ महीनों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उन्हें जेल भेजा गया है। साथ ही छात्रों का एक वर्ष खराब न हो, इसके लिए रिकॉर्ड समय में लगभग 22 लाख छात्रों की परीक्षा आयोजित कर परिणाम भी घोषित किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने की दिशा में भी काम करेगी।
Public Examinations Act 2024 क्या है?
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 देश का पहला केंद्रीय एंटी-पेपर लीक कानून है।
इस कानून को 12 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी और 21 जून 2024 से इसे पूरे देश में लागू किया गया।
इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा घोटालों और अन्य अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाना है।
मौजूदा कानून के अनुसार—
- पेपर लीक करने पर 3 से 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- यदि कोई संगठित गिरोह इसमें शामिल पाया जाता है तो 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- यदि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी दोषी पाई जाती है तो उस पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना, परीक्षा की लागत की वसूली तथा चार वर्ष तक परीक्षा आयोजित करने पर रोक लगाई जा सकती है।
- ऐसे अपराध गैर-जमानती हैं और इनमें समझौते की अनुमति नहीं है।
- जांच केवल DSP या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाती है।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह संशोधन?
देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है। खासकर NEET UG परीक्षा विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे थे।
सरकार का मानना है कि Paper Leak Amendment Bill 2026 लागू होने के बाद जांच, ट्रायल और अपील सभी प्रक्रियाएं समयबद्ध होंगी। इससे दोषियों को जल्दी सजा मिलेगी, परीक्षा माफिया पर प्रभावी रोक लगेगी और छात्रों का विश्वास सरकारी भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में और मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि- यदि जांच एजेंसियां निर्धारित समय सीमा का पालन करती हैं और फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रभावी ढंग से काम करते हैं, तो भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।














