उमाकांत त्रिपाठी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर बड़ा बयान दिया है। दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय सुरक्षा समागम को संबोधित करते हुए शाह ने साफ कहा कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह में आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि UCC उनकी परंपराओं, संस्कृति और अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा।
यह कार्यक्रम RSS से जुड़े जनजातीय सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग पहुंचे थे। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ लोग साजिश के तहत यह भ्रम फैला रहे हैं कि UCC लागू होने से आदिवासियों की पारंपरिक व्यवस्था खत्म हो जाएगी। लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा का पूरा ध्यान रखा है।
गृह मंत्री ने कहा कि UCC का उद्देश्य देश में समान नागरिक कानून लागू करना है, लेकिन इसमें आदिवासी समाज की विशेष परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “UCC का कोई भी प्रावधान आदिवासियों पर लागू नहीं होगा और उनके अधिकारों का अतिक्रमण नहीं किया जाएगा।”
अमित शाह ने इस दौरान विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें आदिवासी समाज को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और सरकार पर भरोसा रखें। शाह ने कहा कि मोदी सरकार हमेशा आदिवासी समाज के विकास, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है।
गौरतलब है कि UCC को लेकर देशभर में लंबे समय से बहस चल रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा, जबकि विरोध करने वाले कुछ समूह इसे धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के खिलाफ बताते रहे हैं। ऐसे में अमित शाह का यह बयान आदिवासी समाज को भरोसा दिलाने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक आगामी चुनावों और आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच UCC पर दिया गया यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार आगे इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और विपक्ष इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।













