उमाकांत त्रिपाठी। पीएम मोदी को उपहार में मिले स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी जारी है। यह इस महीने के अंत तक चलेगी। इसमें पीएम मोदी को देश-विदेश से मिले तोहफों को नीलामी के लिए रखा गया है। इसमें लोकप्रिय वस्तुओं में राम दरबार की मूर्ति के साथ-साथ पश्चिमी एशिया के ऐतिहासिक शहर येरुशलम से जुड़ी स्मारिका भी शामिल है। कुल 912 उपहारों की ई-नीलामी कराई जा रही है। 2 अक्टूबर से इसकी शुरुआत हुई थी। 31 अक्टूबर को यह खत्म होगी। पीएम के तोहफों के ई-ऑक्शन का यह पांचवां संस्करण है।
नीलामी से आया पैसा कहां होता है खर्च?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहारों और स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी के बारे में केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बताया कि 2 अक्तूबर से शुरू हुई ई-नीलामी 31 अक्तूबर तक चलेगी। कुल 912 वस्तुओं को नीलामी के लिए रखा गया है। प्रमुख वस्तुओं में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का मॉडल, कामधेनु और येरुशलम की स्मारिका शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जितने भी उपहार मिलते हैं उसकी नीलामी कर जो पैसा आता है वो पैसा नमामि गंगे परियोजना में लगाया जाता है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट की शुरुआत जून 2014 में हुई थी। इस प्रोजेक्ट को 20 हजार करोड़ रुपये से शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य गंगा की सेहत सुधारना है।
कौन से उपहारों की सबसे अधिक मांग
इसके लिए pmmementos.gov.in नाम की वेबसाइट बनाई गई है। प्रधानमंत्री मोदी को मिले तोहफों की नीलामी संस्कृति मंत्रालय करता है। इस नीलामी में सबसे महंगे तोहफे की कीमत 65 रुपये है। यह बनारस घाट की एक पेंटिंग है। संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) में उपहार में मिली वस्तुओं का सांस्कृतिक महत्व बताया। उन्होंने आम लोगों से आगे आने और इसमें भाग लेने का आग्रह किया। लेखी ने इस बात पर जोर दिया कि राम दरबार की मूर्ति, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का मॉडल, कामधेनु और येरूशलम की स्मारिका, इस नीलामी में सबसे लोकप्रिय वस्तु बनकर उभरी हैं। बड़ी संख्या में लोग बोली लगा रहे हैं।













