उमाकांत त्रिपाठी। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन से जुड़े दो बिलों को पेश किया। इस दौरान अमित शाह ने अपने संबोधन में मोदी सरकार की तमाम उपलब्धियां गिनाते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना भी साधा। शाह ने कहा कि- कांग्रेस कहती थी 370 हटाने से कश्मीर में खून की नदिया बह जाएंगी, खून की नदियां तो छोड़ो, किसी की पत्थर चलाने की हिम्मत नहीं हुई। शाह ने आगे कहा कि हमारी सरकार ने ये तय किया कि देश का एक ही निशान एक ही झंडा होना चाहिए, आर्टिकल 370 पहले ही हट जाना चाहिए था। जब कश्मीर में आतंकवाद शुरू हुआ, निशाना बनाकर लोगों को भागना चालू किया गया, उस पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले, शब्दों से अच्छे तरीके से सांत्वना देने वाले नेता तो मैंने बहुत देखे हैं, मगर मोदी जी एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने इनके आंसू सच्चे अर्थ में पोछने का काम किया है।
आज घाटी में हर घर तिरंगा है- शाह
कश्मीर पर बात करते हुए शाह ने कहा कि लाल चौक पर तिरंगा फहराने हम भी गए थे, लेकिन हमें रोक दिया गया था। तब तिरंगा फहराने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी। आज हर घर तिरंगा है, घाटी का एक भी ऐसा घर नहीं जहा तिरंगा नहीं हो। शाह ने आगे बताया कि J-K में 3 साल से जीरो टेरर प्लान लागू है और यह 2026 तक पूरी तरह से लागू हो जाएगा। अमित शाह ने अपने संबोधन में आगे कहा कि 1980 के दशक के बाद आतंकवाद का दौर आया और वह बड़ा भयावह दृश्य था। जो लोग इस जमीन को अपना देश समझकर रहते थे, उन्हें बाहर निकाल दिया गया और किसी ने उनकी परवाह नहीं की। जिन लोगों पर इसे रोकने की जिम्मेदारी थी वे इंग्लैंड में छुट्टियों का आनंद ले रहे थे। जब कश्मीरी पंडितों को विस्थापित किया गया, तो वे अपने देश में शरणार्थी के रूप में रहने को मजबूर हो गए।
शाह ने स्वीकारा अधीर रंजन का चैलेंज
लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी बोले कि मैं चुनौती देता हूं कि एक तारीख तय की जाए और कश्मीर मामले पर नेहरू के योगदान पर बहस हो। चौधरी ने दावा किया कि कुछ बीजेपी नेता नेहरू पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने कश्मीर मामले को सही से हैंडल नहीं किया था। इस पर शाह ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि- सरकार ये चुनौती स्वीकार करती है और अभी बहस को तैयार है। गृहमंत्री ने आगे कहा कि- कश्मीर में धारा 370 खत्म होने के बाद कश्मीर में एम्स आदि सुविधाएं आई। अमन और शांति का वातावरण आया है। ये बात आप नहीं समझोगे दादा जब बंगाल में हमारी सरकार आएगी। तब आप समझोगे बंगाल में शांति का वातावरण क्या होता है। शाह ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक लगभग 46,631 परिवार और 1,57,968 लोग अपने ही देश में विस्थापित हो गए। यह विधेयक उन्हें अधिकार दिलाने के लिए है, यह विधेयक उन्हें प्रतिनिधित्व देने के लिए है।














