उमाकांत त्रिपाठी। लोकसभा में गुरुवार को जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2023 पारित किया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज लोकसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि तेलंगाना सरकार की ओर से स्थान निर्धारित नहीं हो पाने के कारण इसमें विलंब हुआ। उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह किये जाने के बाद तेलंगाना के मुलुगू में यह जगह दी गयी है जहां 900 करोड़ रुपये की लागत से विश्वविद्यालय बनेगा। केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2023 को सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश किए गए कुछ संशोधनों को खारिज करते हुए ध्वनि मत से पारित कर दिया। विश्वविद्यालय की स्थापना आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में की गई प्रतिबद्धताओं के अनुसरण में की जा रही है।
बिल पेश करते हुए क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
बिल को पेश करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने मोदी सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार नारे के माध्यम से शासन व्यवस्था नहीं चलाती बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार करने में विश्वास रखती है। केंद्रीय मंत्री ने ‘ड्रॉप आउट’ को लेकर सदस्यों के आंकडों को आधा सच करार देते हुए कहा कि विभिन्न विकल्पों की तलाश और घर-परिवार की परिस्थितियों के कारण बीच में पढ़ाई छोड़ना भी इसकी महत्वपूर्ण वजह होती है। कोरापुट और अमरकंटक स्थित जनजातीय विश्वविद्यालयों के पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि वहां कभी भी निर्धारित प्रतिशत के नीचे आदिवासी छात्रों की संख्या नहीं रही।उन्होंने कहा कि 2014-15 की तुलना में हाल के वर्षों में महिला पीएचडी शोधार्थियों की संख्या में 106 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित बेमुला कांड का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की घटनाएं सभ्य समाज के लिए दु:खद हैं
जनजातीय वर्ग को मिलेगा फायदा
ये विश्वविद्यालय मुख्य रूप से देश के जनजातीय लोगों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएं प्रदान करेगा। इस दौरान राज्य सभा और लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस के कोडीकुन्निल सुरेश ने सरकार से मांग की कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जन-जातियों के लिए उच्चतर शिक्षा संस्थानाओं और विश्वविद्यालयों में आधारित रिक्तियां भरी जाएं। भारी हंगामे के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।














