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सस्ते लोन के लिए करना होगा इंतजार, ना ही होगी होम लोन की EMI कम; RBI ने रेपो रेट में भी नहीं किया कोई बदलाव`

उमाकांत त्रिपाठी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। फिलहाल रेपो रेट 6.5 फीसदी है. आरबीआई ने लगातार 5वीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। एमपीसी की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी जारी है। लागत खर्च में कमी से विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती आई है। सरकारी खर्चे से निवेश के रफ्तार में आई तेजी है। रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांता दास ने को मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान किया। आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लगातार पांचवीं बार ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है।

जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7 फीसदी किया

एमपीसी के 6 में से 5 सदस्य ब्याज दरों में बदलाव न करने के फैसले के पक्ष में रहे। रेपो रेट के साथ ही स्थायी जमा सुविधा और सीमांत स्थायी सुविधा दरों को भी स्थिर रखा गया। जहां स्टैडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी को 6.25 फीसदी तो वहीं मार्जिनल स्टैडिंग फैसिलिटी को 6.75 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। शक्तिकांत दास ने कहा कि नवंबर में पीएमआई बढ़ा है, वहीं जीएसटी कलेक्शन में भी ग्रोथ देखने को मिली है। दूसरी तिमाही (Q2FY24) में उम्‍मीद से बेहतर GDP आंकड़े रहे. इसे देखते हुए आरबीआई गवर्नर ने वित्‍त वर्ष 2024 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। रिजर्व बैंक का ‘withdrawal of accommodation’ का रुख कायम है. गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई दर को 4 फीसदी के नीचे लाने पर फोकस रहेगा।

यूपीआई पेमेंट लिमिट की 5 लाख

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने यूपीआई यूजर्स के लिए बड़ा ऐलान किया है। इसके तहत अस्पताल (हेल्थकेयर) और शैक्षणिक संस्थाओं में यूपीआई से पेमेंट की लिमिट 5 लाख रुपए कर दी गई है। कुछ सेवाओं को छोड़कर पहले यह लिमिट एक लाख रुपए थी। RBI ने म्युचुअल फंड के सब्स्क्रिप्शन, इन्श्योरेन्स प्रीमियम के पेमेंट और क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान के लिए e-mandates की लिमिट 15 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने का भी एलान किया है। एमपीसी की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी जारी है। लागत खर्च में कमी से विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती आई है। सरकारी खर्चे से निवेश के रफ्तार में आई तेजी है। एग्रो क्रेडिट में ग्रोथ से रिकवरी बेहतर होने का अनुमान है।

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