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दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती है देश की संस्कृति, इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन बिएननेल 2023 के उद्घाटन में बोले पीएम मोदी

उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले में आयोजित होने वाले पहले भारतीय कला वास्तुकला और डिजाइन द्विवार्षिक (आईएएडीबी) 2023 में स्मारक डाक टिकट जारी किया। नई दिल्ली में इंडिया आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन बिएननेल 2023 का उद्घाटन कर PM मोदी ने कहा, आज आजादी के अमृतकाल में भारत सांस्कृतिक समृद्धि के नए आयाम गढ़ रहा है, इसके लिए ठोस प्रयास कर रहा है। आज देश विरासत पर गर्व की भावना को लेकर अपने उसी गौरव को फिर से आगे बढ़ा रहा है। आपको बता दें कि दिल्ली के लाल किले में 09 से 15 दिसंबर तक आईएएडीबी का आयोजन किया जा रहा है।

पीएम ने की जैसलमेर की हवेलियों की तारीफ

अपने सम्बोधन के दौरान जैसलमेर की पटवा हवेली व उनकी 5 हवेलीयों के समूह की बनावट की तारीफ की। दिल्ली में इंडिया आर्ट आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन बिएननेल 2023 के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए पीएम ने कहा कि- आप में से कुछ लोग जैसलमेर गए होंगे तो पटवा हवेली को देखा होगा। पटवा हवेली के समूह का आर्किटेक्टचर नेचुरल एयरकंडीशनर के रूप में काम करता है। इतना ही नहीं, यह आर्किटेक्टचर न केवल लॉग संस्टेनिग होता था, बल्कि एन्वयरमेंटली सस्टेनेबल भी होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की जीवंत संस्कृति और हमारी प्राचीन विरासत दुनियाभर से पर्यटकों को आकर्षित करती है। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभर रहा है और पूरे विश्व में अपने लिए बेहतर भविष्य देख रहा है। भारत के पांच शहरों में कल्चरल स्पेस बनाने की शुरुआत होना भी एक ऐतिहासिक कदम है। दिल्ली के साथ-साथ कोलकाता मुंबई, अहमदाबाद और वाराणसी में बनने वाले कल्चरल स्पेस इन शहरों को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करेंगे।

देश की संस्कृति पर हमें गर्व- पीएम

इस मौके पर उन्होंने कहा कि लाल किले का ये प्रांगण अपने आप में बहुत एतिहासिक है। ये किला केवल इमारत नहीं है यह एक इतिहास है। आजादी के पहले और आजादी के बाद कितनी ही पीढ़ियां गुजर गईं लेकिन लाल किला अडिग है और अमिट है। उन्होंने र्ल्ड हेरिटेज साइट लाल किले में आए सभी लोगों का अभिनंदन किया। आज कला और वास्तुकला से जुड़े हर क्षेत्र में आत्मगौरव की भावना से काम हो रहा है। चाहे केदारनाथ और काशी जैसे हमारे सांस्कृतिक केन्द्रों का विकास हो, महाकाल महालोक जैसे पुनर्निर्माण हों, आज आजादी के अमृतकाल में भारत सांस्कृतिक समृद्धि के नए आयाम गढ़ रहा है, इसके लिए ठोस प्रयास कर रहा है।

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