उमाकांत त्रिपाठी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधन के बाद भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस का नया मसौदा संसद में पेश कर दिया। विधेयक के नए संस्करण में भी संसदीय समिति की सिफारिश को दरकिनार करते हुए अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है। कई धाराएं और प्रावधान अब बदल जाएंगे। IPC में 511 धाराएं हैं, अब 356 बचेंगी। 175 धाराएं बदलेंगी। 8 नई जोड़ी जाएंगी, 22 धाराएं खत्म होंगी। इसी तरह CrPC में 533 धाराएं बचेंगी। 160 धाराएं बदलेंगी, 9 नई जुड़ेंगी, 9 खत्म होंगी। पूछताछ से ट्रायल तक वीडियो कॉन्फ्रेंस से करने का प्रावधान होगा, जो पहले नहीं था। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में 5 करोड़ केस पेंडिंग हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं। इसी तरह जिला अदालतों में जजों के 25,042 पदों में से 5,850 पद खाली हैं।
क्या था धारा 497 कानून
समलैंगिक या अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और व्यभिचार अपराध नहीं है। सरकार ने संशोधित भारतीय न्याय संहिता विधेयक में भी संसदीय समिति की सिफारिशों पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को ही तवज्जो दी है। सरकार ने संसदीय समिति की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए मंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक, 2023 से आईपीसी की धारा 377 और धारा 497 को बाहर रखा है। अगर कोई शादीशुदा महिला किसी अन्य पुरुष से संबंध बनाती है। ऐसी स्थिति में एडल्ट्री कानून के तहत पति उस शख्स के खिलाफ केस कर सकता था। ऐसे ही अगर शादीशुदा पुरुष अन्य महिला से संबंध बनाता है तो पत्नी उस पर केस कर सकती थी। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के तहत क्राइम था, जिसमें आरोपी को पांच साल की सजा और जुर्माना लगाने का प्रावधान था। ऐसे मामलों में महिला के खिलाफ न तो केस दर्ज होता था और न ही उसे सजा देने का प्रावधान था।
अब इसे माना जाएगा आतंकवादी करतूत
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से मंगलवार को पेश नए आपराधिक कानूनों में पहली बार आतंकवाद यानी टेरर एक्ट के लिए अलग से प्रावधान किया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई शख्स भारत की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा को खतरा पैदा करता है और इसके लिए जाली नोट या सिक्के स्मगल करता है, बनाता या इन्हें सर्कुलेट करता है तो वह आतंकवादी करतूत माना जाएगा। भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023 (BNS) के अपडेटेड वर्जन में आतंकवाद के कृत्यों से निपटने वाली धारा 113 में संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य बीएनएस को यूएपीए के प्रावधानों के अनुरूप लाना है। इसमें ‘आतंकवादी कृत्य’ की परिभाषा में बदलाव किया गया है, जिसमें देश की आर्थिक सुरक्षा और मौद्रिक स्थिरता पर हमले शामिल हैं। हालांकि, आम जनता को धमकाने या सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने को अब आतंकवादी कृत्य नहीं माना जाएगा।














