उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर को भारत की अपराजित आत्मा और सभ्यतागत चेतना का प्रतीक बताया है। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ से पहले उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि संघर्ष से पुनर्निर्माण तक भारत की अटूट शक्ति का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2026 की शुरुआत में वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए थे। यह आयोजन मंदिर पर पहले हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने पर हुआ था। अब वे 11 मई को फिर सोमनाथ जाएंगे, जहां भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने का स्मरण किया जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास ‘विध्वंस से सृजन’ की यात्रा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मंदिर के सामने फैला समुद्र और उसकी लहरें यह बताती हैं कि चाहे कितने भी बड़े तूफान आएं, इंसान फिर उठ खड़ा होता है।
उन्होंने प्राचीन शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभास की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान मानी गई है। उन्होंने कहा कि सदियों के आक्रमण और संघर्षों के बावजूद सोमनाथ भारतीय चेतना में हमेशा जीवित रहा।
प्रधानमंत्री ने उन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को भी याद किया जिन्होंने सोमनाथ की रक्षा और पुनर्निर्माण में योगदान दिया। उन्होंने लकुलीश, सोम शर्मा, महाराजा धरासेन चतुर्थ, भीम देव, राजा भोज, सिद्धराज जयसिंह और अहिल्याबाई होल्कर समेत कई नामों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। 13 नवंबर 1947 को उन्होंने मंदिर के पुनर्निर्माण की घोषणा की थी। पीएम ने कहा कि सरदार पटेल के इस आह्वान पर पूरे देश ने समर्थन दिया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि 1951 में जब मंदिर बनकर तैयार हुआ, तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा था कि श्रद्धा और प्रेम को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
पीएम मोदी ने अपने मुख्यमंत्री काल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2001 में सरदार पटेल जयंती के अवसर पर सोमनाथ मंदिर के द्वार खुलने के 50 वर्ष पूरे होने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी शामिल हुए थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में ‘विकास भी, विरासत भी’ के सिद्धांत पर काम किया गया है। सोमनाथ से काशी, अयोध्या, केदारनाथ और उज्जैन तक धार्मिक स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि सोमनाथ भारत की एकता और साझा सभ्यतागत चेतना का प्रतीक है। अगले एक हजार दिनों तक यहां विशेष पूजाएं आयोजित की जाएंगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सोमनाथ यात्रा करने की अपील भी की।














