उमाकांत त्रिपाठी। दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिकों के लिए चार साल बाद भी कोरोना वायरस चिंता का कारण बना हुआ है। पिछले कुछ समय से नियंत्रित लगने वाली संक्रमण की रफ्तार कोरोना के सब-वैरिएंट JN.1 के कारण अचानक एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही है। चिंताजनक बात यह है कि JN.1सब-वैरिएंट भारत में भी दस्तक दे चुका है। दक्षिण भारत में भी इस वायरस के कुछ मामलों की पुष्टि हुई है। WHO ने इसका वैज्ञानिक नाम Sars-CoV-2 रखा है। दुनिया में ये वायरस तेजी से फैल रहा है लेकिन WHO ने इसे अभी तक वैरिएंट ऑफ कन्सर्न की श्रेणी में नहीं रखा है। इसे आसान शब्दों में समझिए की WHO और विशेषज्ञों का मानना है कि इस वायरस से दुनिया के लोगों को खतरे का स्तर काफी कम है। उधर कर्नाटक में कोविड-19 के 20 नए मामले सामने आए है और इस महामारी के कारण दो और लोगों की मौत हो गई।
मौजूदा वैक्सीन है प्रभावी?
भारत में कोविड के नए सब वेरिएंट जेएन.1 वेरिएंट का पहला केस आने के बाद कोविड के मामले बढ़ने लगे हैं। देश में कोविड के एक्टिव मरीजों की संख्या 2600 के पार चली गई है। सरकार के एक्सपर्ट्स, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम और जीनोम सीक्वेंसिंग करने वाली लैब में इस वेरिएंट पर काम किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जेएन. 1 को वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट माना है, लेकिन कहा है कि इस वेरिएंट से गंभीर खतरा नहीं है। एक्सपर्ट बताते हैं कि जेएन. वेरिएंट के अधिकतर मामले फ्लू की तरह ही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस वेरिएंट को गंभीर नहीं माना है। डब्ल्यूएचओ और सीडीसी दोनों पुष्टि करते हैं कि मौजूदा कोविड वैक्सीन कोरोना वायरस के नए सब वेरिएंट जेएन.1 की रोकथाम में प्रभावी है।
40 देशों में फैला नया वेरिएंट
कोरोना के इस नए सब वैरिएंट JN.1 का सबसे पहला केस अगस्त में लक्जमबर्ग में पाया गया था। जिसके बाद यह धीरे-धीरे 36 से 40 देशों में फैल गया। कहा जा रहा है कि यह सब वैरिएंट पिरोला वैरिएंट (बीए 2.86) से जुड़ा हुआ है,जिसे ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट का ऑफशूट कहा जाता है। कोरोना के इस नए-वैरिएंट के लक्षणों में बुखार,गले में खराश, नाक बहना और कुछ मामलों में, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं शामिल हो सकती हैं। नए वैरिएंट का असर लोगों की इम्यूनिटी के अनुसार अलग-अलग तरीके से होता है। हालांकि जो लोग पहले से किसी संक्रमण या गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे लोगों के लिए कोविड का नया वैरिएंट ज्यादा खतरनाक हो सकता है।














