उमााकांत त्रिपाठी।भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ में अब नेपाल भी शामिल हो गया है। पीएम मोदी ने इसे बड़ी बिल्लियों की सात प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक पहल के रूप में शुरू किया था। इसका नाम ‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ (IBCA) रखा है। अब नेपाल ने इसका आधिकारिक सदस्य बनकर एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कदम उठाया है।
जानें- पीएम मोदी ने क्यों बनाया आईबीसीए
पीएम मोदी द्वारा इस गठबंधन को बनाने का उद्देश्य दुनियाभर में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण को बढ़ावा देना और विभिन्न देशों को इस दिशा में सहयोग के लिए एक मंच पर लाना है। शनिवार को IBCA ने यह घोषणा करते हुए बताया कि- नेपाल ने संगठन के मसौदा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे वह अब इसका पूर्ण सदस्य बन गया है। आपको बता दें कि- IBCA एक वैश्विक गठबंधन है, जिसमें फिलहाल 90 देश बड़ी बिल्लियों के संरक्षण में रुचि रखते हुए शामिल हो चुके हैं।
जानिए- किन जानवरों का संरक्षण करता है आईबीसीए
यह संगठन बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए सहयोग और अनुसंधान को बढ़ावा देता है। नेपाल की भागीदारी इस गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि नेपाल में पहले से ही हिम तेंदुआ, बाघ और सामान्य तेंदुआ जैसे प्रमुख प्रजाति के जानवर मौजूद हैं। IBCA ने कहा कि- नेपाल के शामिल होने से न केवल इन प्रजातियों की रक्षा मजबूत होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर संरक्षण प्रयासों को गति मिलेगी। संगठन ने नेपाल सरकार को “साझा पारिस्थितिकीय सुरक्षा” की दिशा में उठाए गए इस कदम के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
जानें-नेपाल में क्या है बाघों की स्थिति
नेपाल ने हाल के वर्षों में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय प्रगति की है। 2009 में जहां देश में केवल 121 बाघ थे, वहीं 2022 की नवीनतम गणना के अनुसार यह संख्या बढ़कर लगभग 355 हो गई है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि संरक्षण प्रयासों में गंभीरता और समर्पण हो तो परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं।
जानिए- कब शुरू हुआ था आईबीसीए
‘इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस’ की शुरुआत 9 अप्रैल 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कर्नाटक के मैसूर में की गई थी। इस पहल का उद्देश्य सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण को वैश्विक आंदोलन बनाना है। भारत की यह पहल आज न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सराही जा रही है। नेपाल की सदस्यता यह दर्शाती है कि दक्षिण एशियाई देश पर्यावरणीय साझेदारी को लेकर गंभीर हैं और बड़े वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।














