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MP में पत्नी ने किया पति का सौदा, गर्लफ्रेंड ने 1.5 करोड़ में खरीद भी लिया, क्या है डील के पीछे की कहानी.?

खबर इंडिया की।कुटुंब न्यायालय भोपाल में पारिवारिक रिश्तों में समझौते का एक अजीब मामला आया है। यहां पत्नी ने एक घर और 27 लाख रुपये नकदी लेकर अपने पति को उसकी प्रेमिका के साथ रहने की इजाजत दे दी।लंबी काउंसलिंग के बाद तीनों पक्षों के बाच यह समझौता करीब डेढ़ करोड़ रुपये में हुआ। दरअसल, एक सरकारी विभाग में कार्यरत 42 वर्षीय शादीशुदा व्यक्ति को अपने ही कार्यालय में कार्यरत 10 साल बड़ी महिला अधिकारी से प्रेम हो गया।

कुटुंब न्यायालय में शिकायत दर्ज
समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं, जिससे पति अपने परिवार से दूरी बनाने लगा। घर में रोजाना होने वाले झगड़ों का असर बच्चों पर भी पड़ने लगा। दंपती की 16 व 12 वर्ष की बेटियां है। माता-पिता के बीच रोज-रोज के झगड़े से परेशान होकर दंपती की बड़ी बेटी ने कुटुंब न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद न्यायालय ने माता-पिता को काउंसलिंग के लिए बुलाया। काउंसलिंग के दौरान पति ने स्वीकार किया कि वह अपनी सहकर्मी अधिकारी के साथ रहना चाहता है। वह पत्नी को तलाक देने के लिए भी तैयार था। उसका कहना था कि उसे घर आने का मन नहीं करता है, क्योंकि वहां हर रोज पत्नी से लड़ाई होती है।वह बेटियों को प्यार करता है, लेकिन वह पत्नी के साथ नहीं रह सकता। काउंसलिंग करने वालों का कहना है कि मामला पांच वर्ष तक चला है। बच्चों के भविष्य को देखते हुए समझौता कराया गया। अब पति-पत्नी के बीच आपसी सहमति से विवाह विच्छेद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पत्नी और बेटियों ने क्या शर्त रखी?
कई बार काउंसलिंग के बाद पत्नी ने बेटियों और खुद के लिए आर्थिक सुरक्षा की मांग रखते हुए एक घर और 27 लाख रुपये की शर्त रखी। इस प्रस्ताव को पति की प्रेमिका ने स्वीकार कर लिया। प्रेमिका का कहना था कि- उसे भी अपने प्रेमी की पत्नी और उनकी बेटियों के भविष्य की चिंता है।इस कारण उसने इस शर्त को स्वीकार कर नकद राशि और मकान उन्हें दे दिया। समाजशास्त्री शशांक शेखर ने बताया कि- ऐसे विवादों का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है, इसलिए किसी भी पारिवारिक निर्णय में उनके हितों को प्राथमिकता देना जरूरी होता है। जब दंपती के बीच प्रेम नहीं है तो फिर साथ रहने का कोई मतलब नहीं है।

 

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