उमाकांत त्रिपाठी।Afghanistan Earthquake:शनिवार शाम अफगानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में आए 6.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे दक्षिण और मध्य एशिया के कई देशों को हिला दिया। भूकंप के झटके अफगानिस्तान के अलावा भारत, पाकिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और तुर्कमेनिस्तान तक महसूस किए गए। भारत में दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और उत्तरी राज्यों के कई हिस्सों में लोगों ने कंपन महसूस किया, जिसके बाद कई लोग एहतियातन घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, यह भूकंप शनिवार शाम 6 बजकर 4 मिनट पर दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र पूर्वोत्तर अफगानिस्तान के कालाफगान क्षेत्र से करीब 81 किलोमीटर दूर स्थित था। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.2 मापी गई, जबकि इसकी गहराई धरती की सतह से लगभग 215 किलोमीटर नीचे थी।
गहराई ज्यादा होने से कई देशों तक पहुंचे झटके
विशेषज्ञों का कहना है कि इस भूकंप का केंद्र धरती की सतह से काफी अधिक गहराई में स्थित था। यही कारण है कि इसके झटके व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में महसूस किए गए। हालांकि, गहरे भूकंपों में सतह पर भारी तबाही की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 36.442 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.672 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप की तीव्रता और गहराई को देखते हुए इसे एक महत्वपूर्ण भूकंपीय घटना माना जा रहा है।
दिल्ली-NCR और जम्मू-कश्मीर में दहशत
अफगानिस्तान में आए इस शक्तिशाली भूकंप का असर भारत के कई हिस्सों में भी देखा गया। दिल्ली-एनसीआर में लोगों ने कुछ सेकंड तक धरती में कंपन महसूस किया। कई इलाकों में लोग एहतियात के तौर पर इमारतों से बाहर निकल आए।
वहीं, जम्मू-कश्मीर में भी भूकंप के झटके काफी स्पष्ट रूप से महसूस किए गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, झटकों के दौरान कई लोग घरों और कार्यालयों से निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। हालांकि, फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
हिंदूकुश क्षेत्र क्यों है इतना संवेदनशील?
अफगानिस्तान का हिंदूकुश क्षेत्र दुनिया के सबसे अधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के बीच लगातार टकराव होता रहता है, जिसके कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर बड़े भूकंप आते रहते हैं।
भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार, हिंदूकुश क्षेत्र में आने वाले कई भूकंप गहरी सतह पर उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण इनके झटके हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं। यही वजह है कि अफगानिस्तान में आया यह भूकंप भारत और मध्य एशिया के कई देशों तक महसूस किया गया।
6.2 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, रिक्टर स्केल पर 6.2 तीव्रता का भूकंप एक शक्तिशाली भूकंपीय घटना मानी जाती है। यदि ऐसा भूकंप कम गहराई पर आए और घनी आबादी वाले क्षेत्र में केंद्रित हो, तो यह बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है।
हालांकि, इस बार भूकंप का केंद्र 215 किलोमीटर की गहराई में होने के कारण इसकी ऊर्जा व्यापक क्षेत्र में फैल गई, जिससे बड़े पैमाने पर विनाश की आशंका कम हो गई। फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भूकंप भविष्य के लिए चेतावनी का संकेत हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में भी आया था भूकंप
इससे पहले शनिवार सुबह भारत के हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुबह 11:38 बजे आए इस भूकंप का केंद्र धर्मशाला से लगभग 22 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में स्थित था।
इस भूकंप की गहराई महज 5 किलोमीटर थी, लेकिन इसकी तीव्रता कम होने के कारण किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली। हिमालयी क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
फिलहाल, नहीं हुई किसी नुकसान की पुष्टि
अधिकारियों के अनुसार, अफगानिस्तान में आए 6.2 तीव्रता के इस भूकंप से अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराने के बजाय सुरक्षा उपायों का पालन करें और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अफगानिस्तान का हिंदूकुश क्षेत्र भविष्य में भी भूकंपीय गतिविधियों का केंद्र बना रह सकता है, इसलिए सतर्कता और तैयारियां बेहद जरूरी हैं।















