MP Deepfake Case ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग किस तरह लोगों की प्रतिष्ठा, निजता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश से ऐसे दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जिनमें AI और डीपफेक तकनीक का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर लोगों को बदनाम करने की कोशिश की गई। पहला मामला उज्जैन का है, जहां MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा की तस्वीर का इस्तेमाल कर कथित डीपफेक अश्लील वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल कर दिया गया। वहीं दूसरा मामला भोपाल का है, जहां शादी से इनकार करने के बाद एक युवती पर युवक की मां और बहन की AI से फर्जी अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप लगा है। दोनों मामलों में पुलिस जांच जारी है।
उज्जैन में MBBS छात्रा बनी डीपफेक साजिश का शिकार
उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में रहने वाली MBBS छात्रा के परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि छात्रा की तस्वीर को कथित तौर पर एडिट कर अश्लील वीडियो तैयार किया गया और गांव के व्हाट्सएप ग्रुपों सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल कर दिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस मामले में छात्रा के एक रिश्तेदार की कथित भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, शुरुआती पड़ताल में आरोप है कि इस पूरी साजिश का उद्देश्य छात्रा के पिता को सामाजिक रूप से बदनाम करना था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि छात्रा की तस्वीर सरकारी रिकॉर्ड से हासिल की गई थी। पुलिस के मुताबिक, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान छात्रा द्वारा जमा की गई फोटो कथित तौर पर आरोपियों तक पहुंची, जिसके बाद उसका इस्तेमाल कर डीपफेक कंटेंट तैयार किया गया।
पुलिस ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार
उज्जैन पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। अधिकारियों के अनुसार, चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी की तलाश जारी है। मामले में एक महिला BLO की भूमिका की भी जांच की गई, जिन्हें बाद में जमानत मिल चुकी है।
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए हैं। डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि डीपफेक वीडियो किस प्रकार तैयार किया गया और किन-किन माध्यमों से उसे प्रसारित किया गया।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में चुनावी और पारिवारिक रंजिश की आशंका सामने आई है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
भोपाल में AI से फर्जी तस्वीरें बनाने का आरोप
दूसरा मामला भोपाल के करोंद इलाके से सामने आया है। शिकायत के अनुसार, एक युवक द्वारा शादी से इनकार किए जाने के बाद उसकी परिचित युवती ने कथित तौर पर बदला लेने के उद्देश्य से AI तकनीक का इस्तेमाल किया।
आरोप है कि युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की फर्जी अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से साझा किए गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद परिवार को सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, इस मामले में आरोपों की जांच अभी जारी है और पुलिस की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
कार्रवाई नहीं होने पर अधिकारियों से लगाई गुहार
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले छोला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि तत्काल कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
AI और डीपफेक का बढ़ता खतरा
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि AI और डीपफेक तकनीक का उपयोग कई सकारात्मक कार्यों में किया जा रहा है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को एडिट कर फर्जी सामग्री तैयार करना उसकी निजता और सम्मान पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर निजी तस्वीरें साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अपने नाम या तस्वीर से जुड़ा संदिग्ध कंटेंट दिखाई दे, तो उसका स्क्रीनशॉट और लिंक सुरक्षित रखते हुए तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
दोनों मामलों की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।















