उमाकांत त्रिपाठी। नई दिल्ली: India-Japan Summit 2026 के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) के बीच गुरुवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई। India-Japan Summit 2026 में दोनों नेताओं ने निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का हिस्सा है और दोनों देशों के रणनीतिक तथा आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
高市早苗首相、インドへようこそ。
初めてのインドご訪問を心より歓迎いたします。明日は、日印特別戦略的グローバル・パートナーシップをさらに深めるべく、幅広い分野にわたり意見を交わすことを楽しみにしています。… https://t.co/TL9j03D8ed
— Narendra Modi (@narendramodi) July 1, 2026
प्रधानमंत्री बनने के बाद साने ताकाइची का यह पहला भारत दौरा है। राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। तीन दिवसीय यात्रा के दौरान वह इंडिया-जापान बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी।
भारत-जापान शिखर सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर चर्चा
हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में रक्षा सहयोग बढ़ाने, अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण, क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति, सप्लाई चेन को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान दोनों विश्वसनीय साझेदार के रूप में एक-दूसरे की भूमिका को और मजबूत करना चाहते हैं। खासकर तकनीक, विनिर्माण और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की प्राथमिकता बन चुका है।
इसके अलावा क्वाड (Quad) सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना जताई जा रही है।
रुपए और येन में व्यापार की दिशा में बड़ा कदम
इस शिखर सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं, जिसके तहत भविष्य में व्यापारिक भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में किया जा सकेगा।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत और जापान के बीच पहली बार स्थानीय मुद्रा आधारित भुगतान की औपचारिक व्यवस्था स्थापित होगी। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी और दोनों देशों की कंपनियों को लेनदेन में अधिक सुविधा मिलेगी।
प्रस्ताव के अनुसार जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी, जिनके माध्यम से सीधे रुपए और येन में भुगतान किया जाएगा। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत घटेगी, ट्रांजैक्शन तेज होंगे और व्यापारिक प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।
2025 में बनी थी सहमति, अब अमल की तैयारी
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का विचार नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसी दस्तावेज में स्थानीय मुद्रा में व्यापार और भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया था।
अब जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ सहयोग समझौते (MoC) की दिशा में काम कर रहा है ताकि इस व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया जा सके।
भारत पहले ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपए के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा चुका है। जुलाई 2022 में RBI ने स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट (Special Rupee Vostro Account) की शुरुआत की थी। इसके माध्यम से विदेशी बैंक भारतीय रुपए में व्यापारिक भुगतान कर सकते हैं।
सरकार के अनुसार अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपी वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर जैसी मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक उपयोग बढ़ेगा।
भारत में लगातार बढ़ रहा जापानी निवेश
भारत और जापान के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच लगभग 27.5 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार दर्ज किया गया।
अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में करीब 3.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश (FDI) किया। वहीं जापान अगले दस वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य तय कर चुका है।
वर्तमान में भारत में लगभग 1,400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं, जिनमें बड़ी संख्या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हुई है। इसके अलावा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना समेत कई प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जापान महत्वपूर्ण भागीदार बना हुआ है।
हाल के महीनों में एक जापानी वित्तीय संस्थान द्वारा यस बैंक में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी दोनों देशों के बढ़ते आर्थिक विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री साने ताकाइची की यह मुलाकात केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रक्षा, उन्नत तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को भी नई गति दे सकती है।
भारत और जापान दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों, मुक्त एवं खुला हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific) और सुरक्षित वैश्विक सप्लाई चेन के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में यह शिखर सम्मेलन आने वाले वर्षों में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।















