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कल देश की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, पचपदरा से बदलेगी भारत की ऊर्जा तस्वीर

उमाकांत त्रिपाठी।PM Modi Pachpadra Refinery Inauguration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान के बालोतरा जिले में स्थित ऐतिहासिक PM Modi Pachpadra Refinery Inauguration कार्यक्रम के तहत देश की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को राष्ट्र को समर्पित करने जा रहे हैं। 79,459 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह विशाल परियोजना न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई गति देगी। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित यह रिफाइनरी देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थापित यह रिफाइनरी देश की पहली ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। इसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के तहत विकसित किया गया है। इस परियोजना पर कुल 79,459 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

रिफाइनरी की क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है, जबकि इसमें 2.4 MMTPA की पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता भी एकीकृत की गई है। 17.0 नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स के साथ यह दुनिया की सबसे आधुनिक और उन्नत रिफाइनरियों में शामिल हो चुकी है।प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसका राष्ट्र को समर्पण भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मिलेगी मजबूती

पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। वर्तमान में देश पेट्रोकेमिकल उत्पादों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। यह परियोजना आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर पर पहुंचाने में मदद करेगी। इसके साथ ही राजस्थान में प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक पार्कों के विकास को भी नई गति मिलेगी।

इस परियोजना से निम्नलिखित क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा:

  • एमएसएमई सेक्टर
  • टेक्सटाइल उद्योग
  • पैकेजिंग उद्योग
  • ऑटो पार्ट्स निर्माण
  • एग्री-फिल्म्स उद्योग
  • प्लास्टिक और डाउनस्ट्रीम उद्योग

इन उद्योगों को स्थानीय स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध होने से उत्पादन लागत कम होगी और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है पचपदरा रिफाइनरी

राजस्थान की रेतीली धरती पर इस विशाल परियोजना का निर्माण इंजीनियरिंग की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके निर्माण में जिन संसाधनों का उपयोग किया गया, वे इसकी भव्यता को दर्शाते हैं।

निर्माण के दौरान लगभग 1.5 करोड़ घन मीटर मिट्टी हटाई गई, जो विश्व प्रसिद्ध गीजा के पिरामिड निर्माण में उपयोग की गई मात्रा से लगभग छह गुना अधिक बताई जा रही है।

इसके अलावा:

  • करीब 16 लाख घन मीटर कंक्रीट का उपयोग किया गया, जो बुर्ज खलीफा के निर्माण में उपयोग हुए कंक्रीट से लगभग पांच गुना अधिक है।
  • लगभग तीन लाख मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल हुआ, जो एफिल टॉवर में उपयोग किए गए स्टील से करीब 40 गुना ज्यादा है।
  • रिफाइनरी परिसर में 28 हजार किलोमीटर लंबी केबल बिछाई गई, जिसकी लंबाई पृथ्वी के व्यास से भी अधिक है।
  • यहां निर्मित 125 मीटर ऊंचा कोक डोम विश्व प्रसिद्ध गोल गुम्बज से लगभग तीन गुना बड़ा बताया जा रहा है।

ये आंकड़े इस परियोजना को केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं बल्कि आधुनिक इंजीनियरिंग की एक मिसाल बनाते हैं।

रोजगार और राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा

पचपदरा रिफाइनरी ने निर्माण चरण में ही बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया है। परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जबकि परिवहन, निर्माण सामग्री, सेवा क्षेत्र और अन्य सहायक गतिविधियों के माध्यम से करीब एक लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि परियोजना के पूर्ण संचालन के बाद भी हजारों लोगों को स्थायी और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता रहेगा। इससे पश्चिमी राजस्थान के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

राजस्थान लंबे समय से कृषि और खनन आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर रहा है। ऐसे में यह रिफाइनरी राज्य को औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे निवेश आकर्षित होगा, नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

पश्चिमी भारत के औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनेगा पचपदरा

विशेषज्ञों का मानना है कि पचपदरा रिफाइनरी आने वाले वर्षों में पश्चिमी भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और पेट्रोकेमिकल केंद्रों में शामिल हो सकती है। इस परियोजना से न केवल राजस्थान बल्कि गुजरात, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों के उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।

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