उमाकांत त्रिपाठी। मेलबर्न: India Australia Uranium Deal के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया ने ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के बीच मेलबर्न में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन समझौतों की घोषणा की गई।
Witnessed a truly exceptional musical performance featuring Australia’s ancient Didgeridoo and India’s Tabla. The harmony between these two timeless instruments beautifully reflected the deep cultural connect between our two nations.
Compliments to Mr. Ron Murray and Dr. Sam… pic.twitter.com/GTZtym4qur
— Narendra Modi (@narendramodi) July 8, 2026
India Australia Uranium Deal के तहत अब ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। इसके अलावा दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर विकसित करने, गगनयान मिशन के लिए स्पेस ट्रैकिंग सुविधा तैयार करने और AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी तथा सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान करने पर भी सहमति जताई है।
India's growth story presents immense opportunities for Australian businesses. Together, we can build trusted and future-ready partnerships. https://t.co/SpniY4kdLB
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
यूरेनियम सप्लाई से भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मिलेगी मजबूती
बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि India Australia Uranium Deal भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है और परमाणु ऊर्जा इसमें अहम भूमिका निभाएगी। ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति शुरू होने के बाद भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को स्थिर ईंधन उपलब्ध होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा आज हर देश की प्राथमिकता बन चुकी है और यह समझौता भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी बताया कि 2015 के भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते के तहत यूरेनियम निर्यात व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है।
Gaganyaan Mission को मिलेगा ऑस्ट्रेलिया का सहयोग
India Australia Uranium Deal का एक महत्वपूर्ण पहलू अंतरिक्ष सहयोग भी रहा।
दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह सुविधा भारत के महत्वाकांक्षी Gaganyaan Mission के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
इस ट्रैकिंग स्टेशन के माध्यम से अंतरिक्ष मिशनों की निगरानी, संचार और डेटा संग्रहण को बेहतर बनाया जा सकेगा।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के विस्तार में यह सहयोग एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
AI, Quantum Computing और Semiconductor में बढ़ेगा सहयोग
बैठक के दौरान दोनों देशों ने Australia-India Cyber, Critical Technology and Supply Chain (PACTS) साझेदारी शुरू करने की घोषणा की।
इसके तहत दोनों देश निम्न क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च करेंगे—
Artificial Intelligence (AI)
Quantum Computing
Semiconductor Technology
Cyber Security
Digital Resilience
Critical Technologies
विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीकों के क्षेत्र में यह साझेदारी भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर विकसित करेंगे दोनों देश
बैठक के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स पर भी विशेष जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी, रक्षा उद्योग और हाई-टेक निर्माण के लिए निकेल, लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं।
इसी उद्देश्य से भारत और ऑस्ट्रेलिया संयुक्त रूप से Critical Minerals Corridor विकसित करेंगे।
इस पहल के तहत—
सप्लाई चेन मजबूत होगी।
स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को गति मिलेगी।
भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी।
चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
रक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम
India Australia Uranium Deal केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रही।
दोनों देशों ने रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त घोषणा पत्र पर भी हस्ताक्षर किए।
मुख्य निर्णयों में शामिल हैं—
India-Australia Defence Innovation Corridor की स्थापना।
रक्षा स्टार्टअप्स को जोड़ना।
संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विस्तार।
नौसैनिक सहयोग बढ़ाना।
जहाज निर्माण, मरम्मत और रखरखाव में साझेदारी।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग मजबूत करना।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख रणनीतिक सुरक्षा साझेदार बन चुका है।
पीएम मोदी ने क्रिकेट से समझाया दोनों देशों का रिश्ता
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की तुलना क्रिकेट से करते हुए कहा—
“हमारा रिश्ता क्रिकेट की तरह है। एजेंडा वनडे जैसा स्पष्ट होता है, फैसले टी-20 की तरह तेज होते हैं और हमारी साझेदारी टेस्ट मैच की तरह मजबूत एवं लंबे समय तक चलने वाली है।”
प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देश इस क्षेत्र में मिलकर काम करते रहेंगे।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि पहले दोनों देशों की सप्लाई चेन तो जुड़ी हुई थी लेकिन नीतियां अलग थीं। अब नई साझेदारी उस दूरी को समाप्त करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि—
भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को छह वर्ष पूरे हो चुके हैं।
रक्षा, शिक्षा, विज्ञान, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा।
समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मिली नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि India Australia Uranium Deal केवल एक ऊर्जा समझौता नहीं बल्कि आने वाले दशकों की रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव है।
यूरेनियम आपूर्ति से भारत के स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम को गति मिलेगी, जबकि Gaganyaan Mission में सहयोग भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत देगा। AI, Quantum Computing, Semiconductor और Cyber Security जैसे भविष्य के क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च दोनों देशों को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे ले जा सकती है।
इसी के साथ रक्षा सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीति यह संकेत देती है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया आने वाले वर्षों में केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी भी बनेंगे।














