उमाकांत त्रिपाठी। India Australia Uranium Deal भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ने वाला समझौता साबित हो रहा है। मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, न्यूक्लियर एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। इस दौरान यूरेनियम सप्लाई को लेकर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और भविष्य की परमाणु ऊर्जा क्षमता के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
Held wide-ranging discussions with Prime Minister Albanese in Melbourne this afternoon. The India-Australia Comprehensive Strategic Partnership of 2022 has continuously expanded the scope of our cooperation. We have now decided to accelerate work on the Comprehensive Economic… pic.twitter.com/484H9hi6Pf
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और अब इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का समय है।
India Australia Uranium Deal से भारत को क्या मिलेगा?
मेलबर्न में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
India-Australia meetings are much like cricket:
The agenda is as focused as a One-Day International.
The decisions are as fast as T20 cricket.
The partnership is as long-lasting and deep as a Test match. pic.twitter.com/ENW5w9KNXM
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
उन्होंने कहा कि भारत ने हाल ही में न्यूक्लियर सेक्टर को निजी निवेश के लिए भी खोला है। इससे भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा होंगे।
Addressing the joint press meet with PM Albanese.@AlboMP https://t.co/CZ96A4au2x
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
प्रधानमंत्री के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम भारत के स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम को गति देगा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
क्लीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन पर भी बढ़ेगा सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत तेजी से ग्रीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत में—
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
सोलर मॉड्यूल निर्माण
विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरिंग
हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट
Always good to catch up with Mr. Scott Morrison, former Prime Minister of Australia. We had a great conversation on the India-Australia friendship.@ScoMo30 pic.twitter.com/72UtdxdSev
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।
भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इन लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर बनेगा नया इकोसिस्टम
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अत्याधुनिक तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
Addressed the Australia-India CEO Forum in Melbourne this morning. Since 2023, this forum has gained remarkable momentum, reflecting the growing confidence in our economic partnership.
I thank PM Anthony Albanese for joining the interaction and sharing his vision for taking our… pic.twitter.com/6GDcsAkJUv
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार—
AI Mission
Quantum Mission
Semiconductor Programme
के तहत 10 बिलियन डॉलर से अधिक का सहयोग पहले ही उपलब्ध करा चुकी है।
उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर—
डेटा सेंटर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
क्वांटम कंप्यूटिंग
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
सेमीकंडक्टर निर्माण
जैसे क्षेत्रों में वैश्विक समाधान विकसित कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए भारत में बड़े अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई उद्योगपतियों को भारत में निवेश का खुला निमंत्रण दिया।
उन्होंने कहा कि भारत के—
पोर्ट
एयरपोर्ट
रेलवे
सड़क
शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर
जैसे क्षेत्रों में निवेश के बड़े अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां दीर्घकालिक निवेश के लिए स्थिर माहौल उपलब्ध है।
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट में भी साझेदारी मजबूत होगी
प्रधानमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को भी नई दिशा देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि डीकिन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग द्वारा गुजरात के GIFT City में कैंपस खोलना भारत के प्रति विश्वास का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल छात्र आदान-प्रदान नहीं बल्कि Talent Partnership विकसित करना होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्यों, विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सीधे सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाए।
राज्यों के बीच भी बनेगी नई साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों के बीच औद्योगिक सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—
वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के क्रिटिकल मिनरल्स को ओडिशा और गुजरात की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जोड़ा जा सकता है।
क्वींसलैंड और तस्मानिया की क्लीन एनर्जी विशेषज्ञता पंजाब, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को नई गति दे सकती है।
साउथ ऑस्ट्रेलिया की रक्षा एवं स्पेस क्षमता उत्तर प्रदेश और केरल के साथ नए अवसर पैदा कर सकती है।
ECTA समझौते से व्यापार को मिली नई रफ्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया-भारत इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट (ECTA) लागू होने के बाद दोनों देशों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2020-21 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर 2024-25 में लगभग 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि अब दोनों देश व्यापक CECA समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे व्यापार और निवेश को और बढ़ावा मिलेगा।
भारत को भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया सप्लाई चेन संकट, ऊर्जा चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का भरोसेमंद साझेदार के रूप में साथ आना दोनों देशों ही नहीं बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पेंशन फंड को करोड़ों परिवारों की अमानत माना जाता है और देश सुरक्षित, स्थिर तथा दीर्घकालिक निवेश का अवसर प्रदान करता है।














