उमाकांत त्रिपाठी।PM Modi ESTIC 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विकसित भारत की नींव वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास पर टिकी होगी। भारत नई सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। देश का लक्ष्य केवल आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का विस्तार करते हुए आत्मनिर्भर बनना भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2026) का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है। सम्मेलन 27 और 28 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें 12 प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श होगा और तीन नोबेल पुरस्कार विजेताओं के भी वक्ता के रूप में शामिल होने की जानकारी दी गई है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक सोच, नई खोजों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक का वास्तविक उद्देश्य आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।
1. AI के दौर में वैज्ञानिक सोच विकसित करना जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सवाल पूछने की प्रवृत्ति को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। AI कई नियमित काम कर सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल लोगों की सोचने, समझने और नई खोज करने की क्षमता को कमजोर करने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत को तकनीक अपनाने के साथ-साथ अनुसंधान और नई खोजों पर भी ध्यान देना होगा। वैज्ञानिक संस्थानों और शोधकर्ताओं को ऐसे समाधान विकसित करने चाहिए, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मददगार हों।
भारत में विज्ञान और नवाचार की लंबी परंपरा रही है। शून्य की खोज और नंबर सिस्टम का विकास भारतीय वैज्ञानिक विरासत के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री ने इसी विरासत के आधार पर आधुनिक तकनीकों के विकास और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया।
2. AI, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी। इन क्षेत्रों में तकनीकी दक्षता देश की आर्थिक प्रगति, सुरक्षा और भविष्य की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
उन्होंने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी संस्थानों से ऐसी तकनीक विकसित करने का आग्रह किया, जिससे भारत अपनी जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम कर सके।
पीएम मोदी के अनुसार, भारत का लक्ष्य केवल नई तकनीकों को अपनाना नहीं, बल्कि देश के भीतर ऐसे समाधान तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जा सके। इससे घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ दुनिया के दूसरे देशों को भी लाभ पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी से लेकर अंतरिक्ष, AI और सेमीकंडक्टर तक प्रत्येक क्षेत्र की जरूरतें अलग हैं, लेकिन इन सभी का साझा उद्देश्य भारत को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।
3. रिसर्च इकोसिस्टम को बढ़ावा, पेटेंट की संख्या में बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री ने भारत में अनुसंधान के बढ़ते दायरे का उल्लेख करते हुए पेटेंट दाखिल करने के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लगभग 10 साल पहले देश में एक साल के दौरान 50 हजार से कम पेटेंट दाखिल होते थे, जबकि पिछले साल यह संख्या बढ़कर करीब 1.5 लाख पहुंच गई।
उन्होंने बताया कि सरकार ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता जताई है। उनके संबोधन के मुताबिक, सरकार की ओर से 12 हजार करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ निजी क्षेत्र भी 12 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के रिसर्च इकोसिस्टम का लगातार विस्तार हो रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान किसी भी देश को अपनी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने और उनके समाधान तलाशने में मदद करता है।
उन्होंने ‘जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ के विचार को आगे बढ़ाते हुए शोध और नवाचार को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। प्रधानमंत्री ने पिछले साल इसी मंच से अनुसंधान के लिए एक लाख करोड़ रुपये की घोषणा का भी उल्लेख किया।
4. स्वास्थ्य और शिक्षा में बदलाव लाने वाली तकनीक पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक को अक्सर रक्षा और रणनीतिक ताकत के नजरिए से देखा जाता है, लेकिन भारत के लिए इसका एक बड़ा उद्देश्य आम जनता की सेवा करना है।
उन्होंने कहा कि किसी तकनीक की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह कितनी आधुनिक है। असली महत्व इस बात का है कि उससे कितने लोगों के जीवन में सुधार आता है।
इसी सोच के तहत भारत में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी तकनीकों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। बेहतर तकनीक से बीमारियों की पहचान, इलाज, शिक्षा की पहुंच और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार लाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में चेन्नई स्थित IIT मद्रास में आधुनिक ब्रेन सेंटर के उद्घाटन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यहां मस्तिष्क की 3D तस्वीरें तैयार करने जैसी आधुनिक तकनीकों पर काम हो रहा है। ऐसी तकनीकें मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को समझने और उनके इलाज के नए रास्ते तलाशने में मदद कर सकती हैं।
5. युवाओं और वैज्ञानिक संस्थानों को भविष्य के लिए तैयार करने का आह्वान
ESTIC 2026 में प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों और संस्थानों से आज की जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि AI, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्र भविष्य को आकार देने और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का भी उल्लेख किया। डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ देश को ऐसे समाधान विकसित करने होंगे, जो तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा को भी मजबूत बनाएं।
प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में शामिल प्रतिभागियों से यह तय करने का आग्रह किया कि वे कौन-सी ऐसी प्रतिभा और विशेषज्ञता विकसित करेंगे, जिससे भारत के साथ पूरी दुनिया को फायदा हो सके।
उन्होंने युवाओं की क्षमता और नए प्रयोग करने के संकल्प पर भरोसा जताते हुए ‘वी विल डू इट’ का नारा दोहराया। उनका संदेश था कि भारत के पास प्रतिभाशाली युवा, वैज्ञानिक क्षमता और कुछ नया करने की इच्छाशक्ति है। इन संसाधनों का सही इस्तेमाल देश को तकनीकी क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
6. ESTIC 2026 में 12 क्षेत्रों पर चर्चा, वैश्विक समाधान विकसित करने पर जोर
इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव विज्ञान और तकनीक से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नवाचार से जुड़े लोगों को एक मंच प्रदान करता है। 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन में 12 क्षेत्रों पर चर्चा की जा रही है।
इसका व्यापक उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, नई तकनीकों के विकास को गति देना और भारत के नवाचार तंत्र को मजबूत करना है। सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं के जरिए भविष्य की तकनीकी जरूरतों, अनुसंधान के अवसरों और विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने भारत के लिए बड़े स्तर पर समाधान विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। इसका मतलब है कि देश में तैयार तकनीक और अनुसंधान का लाभ केवल कुछ संस्थानों या लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यापक स्तर पर आम जनता और दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचे।
विकसित भारत के लक्ष्य में विज्ञान की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ESTIC 2026 संबोधन का मुख्य संदेश है कि भारत की विकास यात्रा में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। AI, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित करना भी प्राथमिकता है।
भारत के सामने चुनौती केवल नई तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि अनुसंधान को मजबूत करने, प्रतिभाओं को अवसर देने और विकसित समाधानों को आम लोगों तक पहुंचाने की भी है। यदि वैज्ञानिक संस्थानों, निजी क्षेत्र और युवाओं के प्रयासों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे देश की तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिल सकती है।
ESTIC 2026 इसी दिशा में विज्ञान, तकनीक और नवाचार को विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच है।














