Raxaul Retired Principal Case: खबर इंडिया की।बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में एक 66 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल की जिंदगी से जुड़ा मामला सामने आया है। करीब 60 हजार रुपये मासिक पेंशन पाने वाली और करोड़ों की संपत्ति की मालकिन बताई जा रहीं आभा देवी अपने ही घर में बदहाल हालत में मिलीं। उन्हें एक कमरे में बंद रखा गया था। आसपास के लोगों की सूचना पर पुलिस और सामाजिक संस्था की टीम मौके पर पहुंची और कमरे का ताला तोड़कर उन्हें बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में जब उनकी सबसे छोटी बेटी श्रुति पांडेय उनसे मिलने पहुंचीं और अपने साथ चलने के लिए कहा, तो आभा देवी ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह कहीं भी रह लेंगी, लेकिन बेटियों के साथ नहीं जाएंगी। आभा देवी का आरोप है कि उन्हें कमरे में बंद कर दिया जाता है और दो-दो दिन तक कोई देखने नहीं आता। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन दिनों से उन्होंने कुछ नहीं खाया है।
इस घटना ने परिवार के भीतर बुजुर्गों की देखभाल, संपत्ति और रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रक्सौल में बंद कमरे में बदहाल मिलीं पूर्व प्रिंसिपल
जानकारी के मुताबिक, आभा देवी गुरुवार रात रक्सौल के वार्ड नंबर 21 स्थित अपने घर में एक बंद कमरे में मिली थीं। उनकी हालत काफी खराब थी। आसपास के लोगों को जब उनकी स्थिति की जानकारी मिली तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
इसके बाद पुलिस और स्वच्छ रक्सौल संस्था की टीम मौके पर पहुंची। कमरे का ताला तोड़कर आभा देवी को बाहर निकाला गया और तत्काल अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आभा देवी की उम्र 66 वर्ष है। वह फूलचंद साह मध्य विद्यालय की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। करीब छह साल पहले वह अपने पद से रिटायर हुई थीं। उम्र और बीमारी के कारण अब वह ठीक से चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं।
अस्पताल में उनसे मिलने पहुंची उनकी सबसे छोटी बेटी श्रुति पांडेय ने उन्हें अपने साथ ले जाने की बात कही, लेकिन आभा देवी इसके लिए तैयार नहीं हुईं।
उन्होंने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, ‘मैं कहीं भी रह लूंगी, लेकिन बेटियों के साथ नहीं जाऊंगी। मुझे कमरे में बंद करके दो-दो दिन तक गायब हो जाती है। फिर यह देखने आती है कि मैं जिंदा हूं या मर गई। पिछले तीन दिनों से कुछ नहीं खाया है। भगवान सब देख रहा है।’
हालांकि, आभा देवी के आरोपों को लेकर बेटी का पक्ष और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच सामने आना बाकी है।
छह साल पहले रिटायर हुई थीं, परिवार की आर्थिक स्थिति थी अच्छी
स्वच्छ रक्सौल संस्था के अध्यक्ष रंजीत सिंह के मुताबिक, आभा देवी करीब छह साल पहले स्कूल से रिटायर हुई थीं। उस समय उनके परिवार में सबकुछ सामान्य था। उनकी तीन बेटियां थीं। दो बड़ी बेटियों की शादी हो चुकी थी, जबकि सबसे छोटी बेटी श्रुति अपने माता-पिता के साथ रहती थीं।
रिटायरमेंट के बाद आभा देवी को हर महीने करीब 60 हजार रुपये पेंशन मिलने लगी थी। उनके पति ओम प्रकाश पांडेय भी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे थे। वह वार्ड पार्षद रह चुके थे और नगर परिषद की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी थे।
परिवार की आमदनी का एक अन्य जरिया घर के नीचे बनी दुकानें थीं, जिनसे किराया मिलता था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परिवार की कुल संपत्ति करीब 10 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है।
आभा देवी के पूर्व सहयोगी अजय पांडेय ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। दंपती ने अपनी दोनों बड़ी बेटियों की शादी काफी धूमधाम से की थी। उनके मुताबिक, दोनों शादियों में 50-50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे।
बड़ी बेटी के पति दिल्ली में इंजीनियर हैं, जबकि दूसरी बेटी के पति बिजनेस करते हैं। दोनों बेटियां शादी के बाद अपने-अपने परिवार के साथ रहने लगी थीं।
पैरालिसिस के बाद बिगड़ी तबीयत, पति और छोटी बेटी करते थे देखभाल
रिटायरमेंट के करीब दो साल बाद आभा देवी को पैरालिसिस हो गया था। उनके शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर चुका था। इस बीमारी के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी होने लगी थी।
उस समय उनके पति ओम प्रकाश पांडेय और सबसे छोटी बेटी श्रुति उनकी देखभाल करते थे। कुछ समय बाद उनकी तबीयत में सुधार हुआ और वह सामान्य तरीके से रहने लगीं।
परिवार में परिस्थितियां अप्रैल 2024 में बदलनी शुरू हुईं। इसी दौरान आभा देवी और उनके पति ने सबसे छोटी बेटी श्रुति की शादी तय की। श्रुति की शादी रामगढ़वा के पास बलुआ वीरता गांव में रहने वाले एक इंजीनियर से हुई।
हालांकि, शादी के करीब तीन महीने बाद ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ओम प्रकाश पांडेय को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।
पति की मौत के बाद आभा देवी घर में अकेली रह गईं। उनकी तीनों बेटियों की शादी हो चुकी थी और वे अपने-अपने ससुराल में रहने लगी थीं।
बड़ी बेटियों से मिलने की उम्मीद, लेकिन नहीं आईं घर
आभा देवी ने बताया कि उनकी दोनों बड़ी बेटियां शादी के बाद एक-दो बार घर आई थीं। इसके बाद वे उनसे मिलने नहीं पहुंचीं। हालांकि, शुरुआत में फोन के जरिए उनका हालचाल लिया जाता था।
आभा देवी के मुताबिक, जब उनकी तबीयत ज्यादा खराब रहने लगी तो बेटियों ने फोन करना भी बंद कर दिया।
अब उनके घर में अकेले रहने और देखभाल की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक समय स्कूल में प्रिंसिपल की जिम्मेदारी संभालने वाली आभा देवी आज अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।
उनकी स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्था के सदस्यों ने उनकी मदद की। फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज कराया गया है।
पुलिस ने कहा- महिला की इच्छा के अनुसार होगी व्यवस्था
इस मामले में रक्सौल के थानाध्यक्ष रमेश महतो ने कहा कि आभा देवी जहां रहना चाहेंगी, उनकी इच्छा के अनुसार ही उनके रहने की व्यवस्था की जाएगी।
अस्पताल में बेटी के साथ जाने से इनकार करने के बाद उनके रहने और देखभाल को लेकर पुलिस की ओर से यह आश्वासन दिया गया है।
फिलहाल इस मामले में परिवार के सभी पक्षों की बात सामने आना जरूरी है। आभा देवी की ओर से लगाए गए आरोपों, संपत्ति से जुड़े विवाद और उनकी देखभाल की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
यह मामला एक बार फिर बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार में रहने के बावजूद अगर कोई बुजुर्ग खुद को असहाय और अकेला महसूस करता है, तो यह समाज के लिए भी चिंता का विषय है।














