1984 Sikh Riots:उमाकांत त्रिपाठी।चंडीगढ़ में रविवार (1 नवंबर 2026) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1984 Sikh Riots यानी 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की रैली के समय पर सवाल उठाए। अमित शाह ने कहा कि जिस तारीख को 1984 में हजारों सिखों की हत्या हुई थी, उसी दिन राहुल गांधी ने दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित की। इससे दंगा पीड़ितों और उनके परिवारों के जख्म फिर से हरे हुए हैं।
चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित तिरंगा पार्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में हजारों सिखों की निर्मम हत्या की गई थी। कई लोगों को जिंदा जला दिया गया था। हिंसा के कारण हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। कई बच्चे अनाथ हुए और अनेक महिलाओं ने अपने पति खो दिए।
गृह मंत्री ने कहा कि 1984 की उस घटना को देश और पंजाब कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के एक बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।
राजीव गांधी के बयान का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा
अमित शाह ने अपने संबोधन में राजीव गांधी के उस बयान को याद करते हुए कहा कि वह इस बयान को जीवनभर नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि 1984 में हजारों सिखों की हत्या हुई, परिवार उजड़ गए और लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा। ऐसे समय में इस तरह का बयान देना बेहद संवेदनशील मामला था।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि हजारों लोगों की हत्या जैसी गंभीर घटना को लेकर इस तरह की टिप्पणी केवल कांग्रेस के नेता ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए वह दर्द आज भी कायम है।
गृह मंत्री ने कहा कि इस घटना में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया। किसी के बच्चे अनाथ हो गए तो किसी महिला ने अपना पति खो दिया। कई लोगों को अपना घर और कारोबार छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। ऐसे में उस तारीख से जुड़ी संवेदनशीलता को समझना जरूरी है।
राहुल गांधी की दिल्ली रैली पर क्यों भड़के अमित शाह?
अमित शाह ने राहुल गांधी की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही कांग्रेस से अपील की थी कि वह 1, 2 या 3 नवंबर को अपनी रैली आयोजित न करे, क्योंकि ये तारीखें 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़ी हैं।
अमित शाह के मुताबिक, भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस को बताया था कि इन तारीखों पर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसके बावजूद कांग्रेस ने रैली आयोजित करने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि राहुल गांधी उस समय काफी छोटे थे और शायद उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं होगी। इसलिए उन्हें 1 नवंबर की तारीख के महत्व का अंदाजा नहीं होगा। लेकिन भाजपा की ओर से अपील किए जाने के बावजूद रैली आयोजित की गई।
अमित शाह ने इसे दंगा पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया। उन्होंने कहा कि भारत और पंजाब के लोग 1984 की उस त्रासदी को कभी नहीं भूल सकते।
गौरतलब है कि INDIA गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर आयोजित की थी। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे।
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मोदी सरकार ने दोबारा खुलवाए 1984 दंगों से जुड़े मामले
अपने संबोधन में अमित शाह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की जांच और पीड़ितों को दिए गए मुआवजे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद इन मामलों की दोबारा जांच कराई गई।
अमित शाह ने दावा किया कि दंगा पीड़ित परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया और हिंसा में शामिल रहे कांग्रेस नेताओं को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कदम उठाए।
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने वर्षों बाद भी 1984 की घटना को भुलाया नहीं जा सकता। जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, उनके लिए यह केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि जिंदगीभर का दर्द है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पुराने मामलों को फिर से खोलकर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके। हालांकि, जांच और कानूनी कार्रवाई से जुड़े इन दावों को अमित शाह के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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चंडीगढ़ में 250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का जिक्र
अमित शाह ने चंडीगढ़ को महान सिख गुरुओं की पावन कर्मभूमि बताते हुए शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ केवल एक सुनियोजित शहर नहीं है, बल्कि यह पंजाब और हरियाणा सहित पूरे उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में 250 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से शहर में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
यह कार्यक्रम चंडीगढ़ के 60वें स्थापना दिवस और चंडीगढ़ पुलिस के 60वें स्थापना दिवस से जुड़े आयोजनों के बीच हुआ। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस को राष्ट्रपति का विशेष सम्मान ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ भी प्रदान किया गया।
अमित शाह ने कहा कि चंडीगढ़ ने शहरी नियोजन के क्षेत्र में देश के सामने एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने शहर की यातायात व्यवस्था और विकास कार्यों की भी सराहना की।
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अमित शाह ने कहा- 1984 का दर्द देश कभी नहीं भूलेगा
अपने भाषण के अंत में अमित शाह ने एक बार फिर 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और पंजाब उस घटना को कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना रैली आयोजित की।
अमित शाह ने राहुल गांधी की रैली के समय को लेकर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि जिस दिन हजारों सिखों की जान गई थी, उसी दिन राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना उचित नहीं था।
इस तरह 1 नवंबर को चंडीगढ़ में दिया गया अमित शाह का संबोधन मुख्य रूप से 1984 के सिख विरोधी दंगों, राजीव गांधी के पुराने बयान और राहुल गांधी की दिल्ली रैली के इर्द-गिर्द रहा। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच 1984 के दंगों को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।














