उमाकांत त्रिपाठी। Amit Shah on Rahul Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को हैदराबाद में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। Amit Shah on Rahul Gandhi के इस बयान के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। शाह ने राहुल गांधी के उस दावे को गलत बताया, जिसमें मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ वोट काटे जाने की बात कही जा रही है।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी SIR का विरोध करके मतदाता सूची में मौजूद फर्जी नामों और घुसपैठियों को बचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो दूसरी जगह चले गए हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। शाह के मुताबिक, ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस पर बोगस वोटों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये सभी दावे अमित शाह और भाजपा का पक्ष हैं। SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आपत्तियां अलग हैं।
हैदराबाद में अमित शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
हैदराबाद में आयोजित मार्च को संबोधित करते हुए अमित शाह ने राहुल गांधी की रैली को ‘घुसपैठिया बचाओ रैली’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि देश में 13 करोड़ वोट काट दिए गए हैं, जबकि उनके मुताबिक यह दावा सही नहीं है।
शाह ने कहा कि हटाए गए नामों में लगभग सवा छह करोड़ ऐसे लोग हैं, जो अपना निवास स्थान बदलकर दूसरी जगह चले गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या एक व्यक्ति को दो अलग-अलग जगहों की मतदाता सूची में नाम रखने और दो बार वोट देने का अधिकार दिया जा सकता है?
गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि करीब तीन करोड़ ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी फर्जी वोटों के सहारे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है।
शाह ने कहा कि भाजपा मतदाता सूची से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि विरोध के बावजूद भाजपा इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच लगातार विवाद चल रहा है। भाजपा का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना, मृत मतदाताओं और स्थान बदल चुके लोगों के नामों की पहचान करना तथा पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना है।
वहीं, कांग्रेस और विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया और उसके तरीके पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इसके जरिए बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए जा सकते हैं। विपक्षी दल चुनाव आयोग से प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा SIR के जरिए चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। भाजपा के अनुसार, मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है।
अमित शाह बोले- भाजपा SIR से नहीं, जनता के समर्थन से चुनाव जीतती है
अपने भाषण में अमित शाह ने राहुल गांधी के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें भाजपा की चुनावी जीत को SIR से जोड़ने की बात कही जाती है। शाह ने कहा कि भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव भी जीते थे, उस समय SIR का मुद्दा इस तरह सामने नहीं था।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम सहित कई राज्यों में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की है। शाह ने इन चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की सफलता का कारण जनता का समर्थन है।
उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेता हर चुनाव के बाद अपनी राजनीतिक रणनीति पर काम करने के बजाय विदेश चले जाते हैं। शाह ने कहा कि राजनीति में जनता के बीच रहकर मेहनत करनी पड़ती है।
गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी संविधान की प्रति हाथ में लेकर चलते हैं, लेकिन संसद की कार्यवाही में बाधा डालकर संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान नहीं करते।
‘नकली संसद में प्रधानमंत्री बन जाइए’, राहुल गांधी पर शाह का तंज
अमित शाह ने राहुल गांधी की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि राहुल गांधी को नकली संसद में प्रधानमंत्री बन जाना चाहिए, क्योंकि असली संसद में प्रधानमंत्री बनने का उनका सपना पूरा नहीं होगा।
शाह ने इस बयान के जरिए कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संसद में चर्चा करनी चाहिए, न कि लगातार विरोध और हंगामा करके कार्यवाही रोकनी चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा EVM, SIR और घुसपैठियों से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष को इन मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी। शाह के मुताबिक, कांग्रेस इन विषयों पर चर्चा करने के बजाय विरोध प्रदर्शन के जरिए सुर्खियों में बने रहना चाहती है।
भाजपा के देशव्यापी अभियान के पीछे ये चार वजहें
भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान की शुरुआत 22 अक्टूबर 2026 को की थी। पार्टी के मुताबिक, अभियान का पहला चरण 22 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों में मार्च, सभाएं और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भाजपा के इस अभियान के पीछे मुख्य रूप से चार वजहें बताई जा रही हैं।
1. SIR का समर्थन: भाजपा विशेष गहन पुनरीक्षण को मतदाता सूची की सफाई और सुधार की प्रक्रिया बता रही है। पार्टी का कहना है कि इससे मृत लोगों, स्थान बदल चुके मतदाताओं और अपात्र नामों की पहचान की जा सकेगी।
2. वोट चोरी के आरोपों का जवाब: राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया तथा मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा इन आरोपों को भ्रामक बताकर जनता के सामने अपना पक्ष रखना चाहती है।
3. चुनाव आयोग का बचाव: भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और बिना ठोस आधार के उस पर आरोप लगाने से उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
4. कांग्रेस और विपक्ष को घेरना: भाजपा विपक्ष पर चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगा रही है। पार्टी इस मुद्दे पर कांग्रेस को राजनीतिक रूप से घेरना चाहती है।
दिल्ली में भी निकला था भाजपा का मार्च
हैदराबाद से पहले भाजपा ने रविवार को दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च निकाला था। दिल्ली में हरि नगर से तिलक नगर तक करीब एक किलोमीटर लंबा मार्च आयोजित किया गया।
इसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों और सिख समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने SIR के विरोध में रामलीला मैदान में रैली के लिए 1 नवंबर की तारीख जानबूझकर चुनी। पार्टी ने इस तारीख को 1984 के सिख विरोधी दंगों की घटनाओं से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
भाजपा का कहना है कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली में सिख समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा हुई थी। पार्टी ने इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर सवाल खड़े किए।
SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विपक्षी नेता
SIR का विवाद अब राजनीतिक रैलियों और बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। खबर के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली में मार्च किया था।
यह मार्च बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाला गया। इसी दिन 12 विपक्षी दलों के 13 नेताओं ने SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा इस प्रक्रिया को चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी बता रही है।
SIR पर सियासी टकराव आगे भी जारी रहने के आसार
हैदराबाद में अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा SIR के मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी को सीधे चुनौती देने की रणनीति अपना रही है। दूसरी ओर, विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां लगातार उठा रहा है और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है।
अब इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल मतदाता सूची की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों का है। एक तरफ भाजपा सूची से अपात्र नाम हटाने को जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष वैध मतदाताओं के नाम कटने की आशंका जता रहा है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ कानूनी बहस भी तेज हो सकती है। अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है और उठाई गई आपत्तियों का समाधान किस तरह किया जाता है।














