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बीरभूम हिंसा: कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बीरभूम के रामपुरहाट पहुंचे, बोगतुई गांव में प्रवेश करने से रोका गया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल के बोगतुई गांव में प्रवेश करने से रोक दिया गया, जहां इस सप्ताह की शुरुआत में तीन महिलाओं और दो बच्चों समेत आठ लोगों को कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया था।

इससे पहले आज पुलिस के जवानों और अधीर रंजन के बीच झड़प भी हो गई है, जिसको लेकर पुलिस का कहना है मुख्यमंत्री की सुरक्षा अहम है, ऐसे में अधीर रंजन बाद में बीरभूम का दौरा करें।

दरअसल आज सीएम ममता बनर्जी को भी बीरभूम जाना है, जिसका एलान उन्होंने कल ही कर दिया था। मुख्यमंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उन्हें जिले का अपना दौरा एक दिन के लिए स्थगित करना पड़ा क्योंकि अन्य राजनीतिक दल पहले से ही वहां जुटे हुए हैं।

सीएम ममता बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के नेता घटनास्थल पर जाते समय ‘लंगचा’ (पड़ोसी बर्दवान जिले के शक्तिगढ़ क्षेत्र में बनने वाली मिठाई) का स्वाद लेने के लिए रुक गए।

https://twitter.com/AHindinews/status/1506931636868300800?s=20&t=y1DZOz2cHDuHxcZsmeua9A

वहीं, हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर यूथ कांग्रेस के बंगाल प्रभारी अमरिश रंजन पांडे ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अर्जी दी है। दरअसल बीरभूम के रामपुरहाट के बोगतुई गांव में मंगलवार को करीब एक दर्जन मकानों में कथित तौर पर आग लगा दिए जाने से दो बच्चों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई।

यह घटना बीते सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता भादू शेख की कथित हत्या के कुछ घंटों के बाद हुई। बीजेपी ने इस हिंसा के लिए राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस समर्थित ‘‘गुंडों’’ को जिम्मेदार ठहराया।

घटना के बाद राज्य में सियासी पारा चढ़ा हुआ है। बुधवार को बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल का दौरा किया। विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है। मामले में CBI और NIA की जांच होनी चाहिए। राष्ट्रपति शासन ही एकमात्र समाधान है, पश्चिम बंगाल को बचाने का। मामले में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। मुख्यमंत्री सिर्फ़ अपनी सरकार को बचा रहीं हैं।

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