खबर इंडिया की।Facebook Link Scam:सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले अश्लील फोटो, वीडियो और आकर्षक ऑफर्स अब सिर्फ मनोरंजन या क्लिकबेट का जरिया नहीं रह गए हैं, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए लोगों को ठगने का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। मुंबई में सामने आए एक ताजा मामले ने इस खतरे को फिर उजागर कर दिया है, जहां 32 वर्षीय एक व्यक्ति फेसबुक पर दिखाई गई अश्लील तस्वीर के जाल में फंस गया और उसके बैंक खाते से 70 हजार रुपये गायब हो गए।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने फेसबुक पर एक अश्लील फोटो देखी और उस पर क्लिक कर दिया। क्लिक करने के कुछ ही समय बाद उसका मोबाइल फोन असामान्य रूप से गर्म होने लगा। शुरुआत में उसे लगा कि यह सामान्य तकनीकी समस्या होगी, लेकिन बाद में पता चला कि उसके बैंक खाते से 70 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एक क्लिक से कैसे हैक हो जाता है फोन?
कई लोगों को यह सवाल परेशान करता है कि आखिर केवल एक लिंक पर क्लिक करने से किसी का स्मार्टफोन कैसे हैक हो सकता है। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पूरी तरह संभव है यदि लिंक किसी खतरनाक मैलवेयर या फिशिंग वेबसाइट से जुड़ा हो।
साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर फर्जी पेज या पोस्ट बनाते हैं। इन पोस्ट्स में अश्लील तस्वीरें, वायरल वीडियो, फ्री गिफ्ट, लॉटरी, सरकारी योजनाओं का लाभ या बड़े इनाम का लालच दिया जाता है। जैसे ही कोई यूजर इन पर क्लिक करता है, उसे किसी संदिग्ध वेबसाइट पर भेज दिया जाता है।कई मामलों में वेबसाइट अपने आप कोई फाइल डाउनलोड कर देती है या यूजर से कुछ परमिशन मांगती है। यहीं से असली खतरा शुरू होता है।
खतरनाक परमिशन देकर खुद खोल देते हैं रास्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई यूजर गलती से किसी ऐप या वेबसाइट को Accessibility Access, Screen Recording, Notification Access या Device Admin जैसी परमिशन दे देता है, तो साइबर अपराधी फोन के कई संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच बना सकते हैं।इन परमिशन के जरिए हैकर यूजर की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं, स्क्रीन देख सकते हैं और कई मामलों में बैंकिंग ऐप्स तक की जानकारी हासिल कर सकते हैं।
Remote Access Trojan क्या है?
कई साइबर हमलों में हैकर Remote Access Trojan (RAT) नामक मैलवेयर का उपयोग करते हैं। यह एक ऐसा खतरनाक सॉफ्टवेयर होता है जो फोन में इंस्टॉल होने के बाद अपराधियों को दूर बैठे ही डिवाइस कंट्रोल करने की सुविधा देता है।RAT की मदद से हैकर मोबाइल स्क्रीन देख सकते हैं, फाइलें एक्सेस कर सकते हैं, ऐप्स खोल सकते हैं और यहां तक कि बैंकिंग लेनदेन पर भी नजर रख सकते हैं। यूजर को कई बार इसका पता भी नहीं चलता।
की-लॉगर सबसे बड़ा खतरा
साइबर अपराधी अक्सर मैलवेयर के साथ Keylogger भी इंस्टॉल कर देते हैं। की-लॉगर ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जो मोबाइल या कंप्यूटर पर टाइप की गई हर जानकारी रिकॉर्ड करता है।
अगर यूजर बैंकिंग ऐप में लॉगिन करता है, यूपीआई पिन दर्ज करता है या नेट बैंकिंग का पासवर्ड लिखता है, तो यह सारी जानकारी सीधे हैकर तक पहुंच सकती है। इसके बाद अपराधी आसानी से खाते से पैसे निकाल सकते हैं।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
- सोशल मीडिया पर दिखने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- अश्लील कंटेंट, फ्री गिफ्ट और लॉटरी वाले ऑफर्स से सावधान रहें।
- किसी भी ऐप को अनावश्यक परमिशन देने से बचें।
- केवल Google Play Store और Apple App Store से ही ऐप डाउनलोड करें।
- मोबाइल में एंटीवायरस और सिक्योरिटी अपडेट हमेशा चालू रखें।
- बैंकिंग ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।
बढ़ रहा है सोशल मीडिया स्कैम का खतरा
भारत में डिजिटल पेमेंट और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को जागरूक रहने की सलाह दे रहे हैं। एक छोटी सी लापरवाही आपकी निजी जानकारी, बैंकिंग डिटेल्स और मेहनत की कमाई को खतरे में डाल सकती है।














