उमाकांत त्रिपाठी। कोलकाता: West Bengal UCC एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और इसके लिए समिति का गठन भी किया जा चुका है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था, अवैध घुसपैठ, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगामी चुनावों को लेकर माहौल लगातार गर्म हो रहा है।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर किया प्रतिमा का शिलान्यास
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्वी कोलकाता में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा का शिलान्यास किया।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को याद करते हुए कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी उन्हीं के सिद्धांतों और विचारों पर आगे बढ़ रही है। शाह ने कहा कि जनसंघ के समय जो संकल्प लिया गया था, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसे पूरा करने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है।
West Bengal UCC पर अमित शाह का बड़ा बयान
अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि West Bengal UCC के लिए समिति का गठन किया जा चुका है और आने वाले समय में राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।
हालांकि उन्होंने इसके लागू होने की कोई निश्चित समय-सीमा या विस्तृत प्रक्रिया साझा नहीं की। लेकिन उनके इस बयान को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
कानून व्यवस्था और घुसपैठ पर भी बोले अमित शाह
गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव संशोधन विधेयक 2026 पारित हो चुका है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने गुंडागर्दी पर कार्रवाई का वादा किया था और यह कानून उसी दिशा में पहला कदम है। साथ ही उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
शाह के अनुसार, कानून व्यवस्था को मजबूत करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
CAA को लेकर भी दिया बड़ा अपडेट
अमित शाह ने अपने भाषण में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू-लियाकत समझौते का अध्ययन किया था, तब उन्होंने इसे एकतरफा बताते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
शाह ने कहा कि उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने CAA लागू किया ताकि पड़ोसी देशों में प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिल सके।
उन्होंने कहा कि नागरिकता देने की शेष औपचारिकताओं को भी जल्द पूरा किया जाएगा।
भाजपा की विचारधारा पर क्या बोले गृह मंत्री?
अमित शाह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में देश के बड़े हिस्से में अपनी विचारधारा के साथ काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि जनसंघ का उद्देश्य केवल सरकार बदलना नहीं था, बल्कि भारत की नीतियों को भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों के अनुरूप बनाना था।
शाह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भरता और भारतीय मूल्यों पर आधारित विकास मॉडल की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से क्यों अहम है यह बयान?
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता को लेकर दिया गया यह बयान आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
राज्य में पहले से ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं।
ऐसे में West Bengal UCC को लेकर अमित शाह का बयान आने वाले समय में राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर सकता है।
हालांकि समान नागरिक संहिता को लागू करने की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है और इससे जुड़े किसी भी अंतिम निर्णय की जानकारी संबंधित सरकार और सक्षम संस्थाओं द्वारा ही आधिकारिक रूप से दी जाएगी।
फिलहाल क्या स्थिति है?
अमित शाह के अनुसार पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए समिति का गठन किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की बात दोहराई।
फिलहाल इस विषय पर आगे की कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक अधिसूचनाओं पर सभी की नजर बनी हुई है। गृह मंत्री के इस बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नई चर्चा को जन्म दे दिया है।














