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BJP ने राज्य प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नई नियुक्तियां कीं, स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़-हरियाणा का जिम्मा, एमपी में किसे मिली कमान

उमाकांत त्रिपाठी।भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार, 23 सितंबर को संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से जारी सूची में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों यानी कुल 36 संगठनात्मक इकाइयों के लिए जिम्मेदारियां तय की गई हैं। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।

नई सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को एक से ज्यादा राज्यों की जिम्मेदारी दी गई है। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा, जबकि राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है। वहीं सुनील बंसल को तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है।

राजस्थान में संजय भाटिया, मध्य प्रदेश में बिप्लब देव

राजस्थान में भाजपा ने संजय भाटिया को नया प्रदेश प्रभारी बनाया है। उनके साथ कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले राजस्थान के प्रभारी डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल थे।

वहीं मध्य प्रदेश में बिप्लब कुमार देव को प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ रेखा वर्मा सह-प्रभारी होंगी। इससे पहले मध्य प्रदेश की संगठनात्मक जिम्मेदारी डॉ. महेंद्र सिंह के पास थी।

मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों ही भाजपा के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक राज्य हैं। नई नियुक्तियों के साथ इन राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।

स्मृति ईरानी और राम माधव को दो-दो राज्यों की जिम्मेदारी

नई सूची में स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में उनके साथ सिद्धार्थ शंभू सह-प्रभारी होंगे, जबकि हरियाणा में डॉ. भोला सिंह सह-प्रभारी की जिम्मेदारी संभालेंगे।

राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है। उत्तराखंड में अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज सह-प्रभारी होंगी। तमिलनाडु में निर्मल कुमार सुराना और डीके अरुणा को सह-प्रभारी बनाया गया है।

इसके अलावा सुनील बंसल को तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है। तेलंगाना में अभय पाटिल और रेखा शर्मा तथा पश्चिम बंगाल में लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा सह-प्रभारी होंगे।

उत्तर प्रदेश में एक प्रभारी, चार सह-प्रभारी

उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

बिहार में हरीश द्विवेदी को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी होंगे। हरीश द्विवेदी को कर्नाटक का भी प्रभारी बनाया गया है। कर्नाटक में डॉ. कासम वेंकटेश्वरलु सह-प्रभारी होंगे।

गुजरात में तरुण चुघ को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ अजय महावर और गोमती साई सह-प्रभारी होंगी। पंजाब में सतीश पूनिया को प्रभारी बनाया गया है और उनके साथ वीरेंद्र सचदेवा तथा डॉ. अलका गुर्जर सह-प्रभारी होंगे। सतीश पूनिया को जम्मू-कश्मीर का भी प्रभारी बनाया गया है।

महाराष्ट्र में तीन सह-प्रभारी

महाराष्ट्र में बैजयंत जय पांडा को प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तनवाडे और कमलजीत सहरावत को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

वहीं अनिल एंटनी को नगालैंड का प्रभारी बनाया गया है। वह गोवा के सह-प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। गोवा में डॉ. भारती प्रवीण पवार प्रभारी हैं।

2027 के चुनाव वाले राज्यों पर भी फोकस

भाजपा की नई संगठनात्मक सूची में उन राज्यों पर भी विशेष ध्यान दिखाई देता है जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के लिए संगठनात्मक टीमों का पुनर्गठन किया गया है।

मणिपुर में डॉ. राजदीप रॉय को प्रभारी बनाया गया है। हिमाचल प्रदेश में श्रीकांत शर्मा प्रभारी और दर्शना सिंह सह-प्रभारी होंगी। उत्तराखंड में राम माधव के साथ अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज सह-प्रभारी हैं।

12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में सह-प्रभारी नहीं

भाजपा की सूची में कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सिर्फ प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। इनमें अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप शामिल हैं। इसके अलावा मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा में भी अलग से सह-प्रभारी नियुक्त नहीं किए गए हैं।

इस संगठनात्मक बदलाव के साथ भाजपा ने राज्यों में अपने प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई टीम तय कर दी है। सूची में कई नेताओं को दो राज्यों की जिम्मेदारी देने के साथ चुनावी राज्यों में संगठनात्मक टीमों को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।

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