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ज्ञानवापी केस को लेकर वादी पक्ष के वकील पर कोर्ट ने लगाया जुर्माना, जानिए फाइन की वजह?

उमाकांत त्रिपाठी। ज्ञानवापी मामले में सुनवाई के वक्त कोर्ट में खराब सेहत का हवाला देकर मौजूद न होना, हिंदू पक्ष के एक वादी के वकील को उस वक्त भारी पड़ गया, जब वकील ने अगली तारीख मांग ली. इस पर कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार तो किया. साथ ही एक हजार रुपये जुर्माना लगा दिया. कोर्ट ने ये जुर्माना वादी संख्या-4 मृतक हरिहर पांडेय के बेटों पर लगाया. मामले में अगली सुनवाी 21 फरवरी को होगी. बताते चलें कि वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहे ज्ञानवापी केस से संबंधित मुकदमा संख्या 610/1991 में केस के वादी संख्या-4 हरिहर पांडेय के अधिवक्ता की तरफ से अनुपस्थित होने पर दाखिल प्रार्थना पत्र दिया था.

मांगी गई थी अगली तारीख
इसमें अस्वस्थता के चलते अगली तारीख मांगी गई थी. इस पर कोर्ट ने ₹1000 जुर्माना लगाते हुए उनके प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया. मालूम हो कि इस मामले में साल 1991 से केस लड़ते चले आ रहे वादी मुकदमा एवं वादमित्र वकील विजय शंकर रस्तोगी को केस हटाने और वादी संख्या-4 हरिहर पांडेय की मौत के बाद उनके बेटों को अगला वादी बनाने के लिए वकील विष्णु शंकर जैन की तरफ से एप्लीकेशन कोर्ट में दी गई थी.

कोर्ट ने दिया था सर्वेक्षण का आदेश
बीते दिनों इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुस्लिम पक्षों की आपत्तियों को खारिज करते हुए वापस केस एफटीसी कोर्ट में चलाए जाने और 6 महीने के अंदर निस्तारण करने का आदेश दिया था. इस केस में 8 अप्रैल 2021 को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था. इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष उच्च न्यायालय पहुंचा था.

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