खबर इंडिया की।जयपुर में Jaipur Online Betting से जुड़े एक कथित नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। मामला शहर के वैशाली नगर इलाके के एक होटल का है, जहां पुलिस ने छापेमारी कर एक कमरे से दो युवकों और एक युवती को पकड़ा। पुलिस के अनुसार, तीनों पर क्रिकेट समेत अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने का आरोप है। जिस कमरे में यह कथित गतिविधि चल रही थी, वह होटल का कमरा नंबर 204 बताया जा रहा है।
बाहर से होटल का यह कमरा बिल्कुल सामान्य नजर आता था। किसी को अंदाजा नहीं था कि अंदर बैठकर कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क चलाया जा रहा है। पुलिस को जब इस गतिविधि की सूचना मिली तो टीम ने होटल में दबिश दी। पुलिस सीधे कमरे नंबर 204 तक पहुंची और दरवाजा खुलने के बाद वहां मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की।
कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मिले। इनमें लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल फोन शामिल हैं। शुरुआती जांच में इन डिवाइस से ऑनलाइन सट्टे से जुड़े डिजिटल सबूत और लेन-देन की जानकारी मिलने की बात सामने आई है।
होटल के कमरे से मिले कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कमरे से दो लैपटॉप, एक टैबलेट और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए। यही डिवाइस अब पूरे मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जा रहे हैं। पुलिस इन उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है ताकि कथित सट्टा नेटवर्क के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल की जा सके।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए किन लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके अलावा ऑनलाइन सट्टे से जुड़े अकाउंट, चैट, डिजिटल भुगतान और अन्य गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
Jaipur Online Betting मामले में पुलिस का फोकस केवल होटल के कमरे तक सीमित नहीं है। जांच का दायरा इस बात तक बढ़ाया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए थे और अलग-अलग स्थानों से इसका संचालन किस तरह किया जाता था।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित सट्टे में लोगों से पैसे किस माध्यम से लिए जाते थे। बैंक अकाउंट, ऑनलाइन पेमेंट और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हुए लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।
करीब 6 लाख रुपये के लेन-देन का हिसाब मिलने का दावा
शुरुआती पुलिस जांच में कमरे से करीब 6 लाख रुपये के लेन-देन का हिसाब मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का अनुमानित मासिक अवैध कारोबार करीब 18 लाख रुपये तक हो सकता है। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर अंतिम स्थिति विस्तृत जांच और डिजिटल रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस का आरोप है कि क्रिकेट और दूसरे खेलों के मुकाबलों पर ऑनलाइन पैसे लगवाने का काम किया जाता था। यानी मैदान पर मैच चल रहा होता था और दूसरी तरफ होटल के कमरे से कथित तौर पर उसके नतीजे और खेल की गतिविधियों पर पैसों का दांव लगाया जा रहा था।
इस तरह के मामलों में डिजिटल डिवाइस की जांच बेहद अहम होती है, क्योंकि मोबाइल और लैपटॉप से कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों, भुगतान के तरीकों और ऑनलाइन गतिविधियों की जानकारी सामने आ सकती है। इसी वजह से पुलिस बरामद किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डेटा खंगाल रही है।
नेपाल और पुणे से जुड़े बताए जा रहे आरोपी
पुलिस के अनुसार, मामले में पकड़े गए आरोपियों की पहचान नेपाल के अशोक पौडेल, परीना गिरी और पुणे के पवन वैष्णव के रूप में बताई गई है। पुलिस अब तीनों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वे इस कथित गतिविधि से कब से जुड़े थे।
शुरुआती पूछताछ में पुलिस के सामने यह भी जानकारी आने की बात कही गई है कि आरोपी एक ही स्थान पर लंबे समय तक नहीं रुकते थे। कथित तौर पर वे अलग-अलग जगहों पर अपने ठिकाने बदलते रहते थे। ऐसे में होटल का कमरा नंबर 204 इस कथित नेटवर्क का सिर्फ एक ठिकाना था या यहीं से इसके बड़े हिस्से का संचालन होता था, यह जांच का अहम सवाल है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इससे पहले आरोपियों ने किन-किन जगहों पर ठिकाना बनाया था। इसके अलावा उनके संपर्क में कौन लोग थे और कथित सट्टे से जुड़े पैसों का अंतिम ट्रेल कहां तक जाता था, इसकी भी जांच की जा रही है।
डिजिटल सबूतों से खुलेगा कथित नेटवर्क का राज
Jaipur Online Betting मामले में पुलिस की जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित है। बरामद किए गए पांच मोबाइल, दो लैपटॉप और एक टैबलेट में मौजूद डेटा की जांच की जा रही है। पुलिस चैट, कॉल डिटेल से जुड़ी जानकारी, ऑनलाइन लेन-देन, सट्टे से संबंधित अकाउंट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाल रही है।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित तौर पर सट्टे में शामिल लोगों से पैसे किस तरह लिए जाते थे। पुलिस बैंक खातों और डिजिटल भुगतान माध्यमों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करके पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही है।
अगर तकनीकी जांच में दूसरे लोगों के नाम, मोबाइल नंबर, बैंक खाते या डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग सामने आते हैं, तो मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है। इससे यह भी पता चल सकता है कि कथित नेटवर्क सिर्फ जयपुर तक सीमित था या इसके तार दूसरे शहरों अथवा राज्यों तक जुड़े हुए थे।
होटल का कमरा नंबर 204 बना जांच का केंद्र
फिलहाल जयपुर के वैशाली नगर स्थित होटल का कमरा नंबर 204 इस पूरे मामले की जांच का केंद्र बना हुआ है। एक कमरे से शुरू हुई पुलिस कार्रवाई अब कथित तौर पर 6 लाख रुपये के लेन-देन और करीब 18 लाख रुपये के अनुमानित मासिक कारोबार की जांच तक पहुंच गई है।
पुलिस के सामने अब कई अहम सवाल हैं। कथित नेटवर्क कितने समय से चल रहा था? इसके पीछे और कौन लोग जुड़े थे? क्या अलग-अलग शहरों में भी इसी तरह के ठिकानों का इस्तेमाल किया जाता था? कथित तौर पर सट्टे से जमा होने वाली रकम किन खातों में पहुंचती थी? इन सभी सवालों के जवाब डिजिटल जांच और आरोपियों से पूछताछ के बाद सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल पुलिस ने बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है। इनके डेटा के आधार पर कथित ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और डिजिटल सबूतों के आधार पर की जाएगी।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध पुलिस जांच संबंधी जानकारी और प्रारंभिक आरोपों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगी।














