उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 25 अगस्त को हुई **PRAGATI Meeting** में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इकोसिस्टम से जुड़े कई अहम मुद्दों की समीक्षा की। 53वीं PRAGATI Meeting की अध्यक्षता करते हुए पीएम मोदी ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़ी 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली छह परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। ये परियोजनाएं देश के नौ राज्यों में फैली हुई हैं। बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
**PRAGATI Meeting** के दौरान प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों, राज्य सरकारों और परियोजनाओं को लागू करने वाली एजेंसियों से बेहतर तालमेल के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, हर चरण में गुणवत्ता जांच और मजबूत निगरानी व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा बैठक में AgriStack, कृषि क्षेत्र में AI के इस्तेमाल और बढ़ते साइबर फ्रॉड, खासकर डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं की भी समीक्षा की गई।
## PRAGATI Meeting में 30,000 करोड़ की छह परियोजनाओं की समीक्षा
53वीं **PRAGATI Meeting** में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे, सड़क और बिजली से संबंधित छह बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की। इन परियोजनाओं की कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। अलग-अलग परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनके समय पर पूरा होने का सीधा संबंध बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों से है।
बैठक में परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति, काम पूरा करने की समय-सीमा, अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के बीच तालमेल तथा लंबित मामलों को दूर करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं को केवल अलग-अलग पैकेज या हिस्सों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
पीएम मोदी का जोर इस बात पर रहा कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की सफलता केवल एक हिस्से का काम पूरा हो जाने से तय नहीं होती। अंतिम लक्ष्य यह होना चाहिए कि पूरी परियोजना निर्धारित समय में तैयार होकर जनता के इस्तेमाल के लिए शुरू हो। इसके लिए शुरुआत से ही विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
## देरी से बढ़ती है लागत, जनता को भी देर से मिलता है फायदा
**PRAGATI Meeting** में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में होने वाली देरी के आर्थिक प्रभाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि किसी प्रोजेक्ट के समय पर पूरा नहीं होने से केवल उसकी लागत नहीं बढ़ती, बल्कि नागरिकों, कारोबार और पूरी अर्थव्यवस्था को मिलने वाले संभावित लाभ भी टल जाते हैं।
बड़े सड़क, रेलवे और बिजली प्रोजेक्ट्स का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है। नई सड़क या रेलवे कनेक्टिविटी शुरू होने से यात्रा का समय कम हो सकता है, माल ढुलाई आसान हो सकती है और नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं। इसी तरह बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट्स का प्रभाव उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों को अधिक प्रो-एक्टिव तरीके से काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने हर स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने और समस्याओं का इंतजार करने के बजाय समय रहते उनका समाधान निकालने पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि किसी परियोजना के अलग-अलग हिस्सों पर काम की गति तभी मायने रखती है, जब उसका अंतिम परिणाम पूरी परियोजना के समय पर पूरा होने और संचालन शुरू होने के रूप में सामने आए।
## तेजी के साथ क्वालिटी भी जरूरी
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता बनाए रखना भी **PRAGATI Meeting** का महत्वपूर्ण विषय रहा। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों से कहा कि परियोजनाओं के हर चरण में क्वालिटी एश्योरेंस और सुपरविजन को मजबूत किया जाए।
आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके निर्माण की निगरानी, प्रगति की समीक्षा और संभावित समस्याओं की पहचान पहले ही की जा सकती है। ऐसे में सरकार की ओर से तकनीकी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
किसी भी बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट में गुणवत्ता का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इनका इस्तेमाल लंबे समय तक आम जनता करती है। सड़क, पुल, रेलवे लाइन, बिजली नेटवर्क या अन्य बुनियादी ढांचे में शुरुआती स्तर पर गुणवत्ता से समझौता होने पर बाद में रखरखाव की लागत बढ़ सकती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इसी वजह से प्रधानमंत्री ने परियोजना की रफ्तार और निर्माण की गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया।
## कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर पर भी पीएम मोदी का जोर
**PRAGATI Meeting** में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाओं के लिए कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि जहां तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव हो, वहां बड़े ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की अवधारणा के पीछे उद्देश्य अलग-अलग यूटिलिटी नेटवर्क के लिए बार-बार सड़क या अन्य बुनियादी ढांचे को खोदने की जरूरत को कम करना है। यदि विभिन्न सेवाओं के नेटवर्क की योजना एकीकृत तरीके से बनाई जाए तो भविष्य में समय और संसाधनों की बचत हो सकती है।
बड़े परिवहन प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय इस तरह की व्यवस्था पर पहले से विचार करने से भविष्य की जरूरतों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में मदद मिल सकती है।
## AgriStack और कृषि में AI के इस्तेमाल पर चर्चा
53वीं **PRAGATI Meeting** में इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा कृषि क्षेत्र से जुड़े डिजिटल इकोसिस्टम की भी समीक्षा की गई। बैठक में AgriStack और कृषि डेटा के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में AI और डेटा आधारित तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया। उनका फोकस इस बात पर रहा कि कृषि वैल्यू चेन में इनपुट प्लानिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक डेटा इकोसिस्टम का प्रभावी उपयोग किया जाए।
कृषि क्षेत्र में सही डेटा का इस्तेमाल किसानों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने, योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
इनपुट की योजना, फसल से जुड़ी जानकारी, उत्पादन, बाजार और प्रोसेसिंग जैसे अलग-अलग चरणों में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से कृषि क्षेत्र में निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है।
## साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट पर भी हुई समीक्षा
**PRAGATI Meeting** में साइबर फ्रॉड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड के मामले भी शामिल हैं, जिनमें अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या किसी सरकारी अधिकारी के रूप में पेश कर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं।
प्रधानमंत्री ने साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए केवल कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय जागरूकता, शिक्षा और प्रशिक्षण को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने लगातार और लक्षित जन-जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई।
खास तौर पर बुजुर्गों, युवाओं और दूसरे कमजोर वर्गों को साइबर अपराध के सामान्य तरीकों, फ्रॉड के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया।
## साइबर फ्रॉड से निपटने वाले कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर जोर
प्रधानमंत्री ने **PRAGATI Meeting** में साइबर अपराध से निपटने वाली व्यवस्था में काम कर रहे कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में जांच और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों को भी समय-समय पर नए फ्रॉड पैटर्न की ट्रेनिंग देना जरूरी है।
नियमित प्रशिक्षण से अधिकारियों और कर्मचारियों को नए तरीकों की पहचान करने और शिकायत मिलने पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही आम नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी साइबर फ्रॉड रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा है।
कुल मिलाकर 53वीं **PRAGATI Meeting** में इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कृषि और डिजिटल सुरक्षा तक कई महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा हुई। 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की छह परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश के साथ प्रधानमंत्री ने गुणवत्ता, तकनीक और जवाबदेही पर जोर दिया। वहीं AgriStack और AI के इस्तेमाल से कृषि क्षेत्र को मजबूत करने तथा साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
**PRAGATI Meeting** के जरिए सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर दिखाई दिया कि बड़े विकास कार्य केवल मंजूरी और निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि समय पर पूरे होकर नागरिकों और अर्थव्यवस्था को उनका वास्तविक लाभ भी मिल सके।














