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जब तक सूरज चांद रहेगा, बिपिन रावत का नाम रहेगा

तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए दर्दनाम हादसे में भारत ने अपना पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ खो दिया। इस हादस दर्दनाक हेलिकॉप्टर हादसे में CDS बिपिन रावत के साथ ही उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 11 लोगों की जान चली गई। गुरूवार को सभी मृतकों का पार्थिव शरीर दिल्ली के पालम एयरबेस पहुंचा। हादसे में मारे गए सभी लोगों के पार्थिव शरीर को एक सैन्य विमान से राजधानी दिल्ली लाया गया। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद शहीदों के परिजनों और रिश्तेदारों जो कि पहले से ही एयरबेस पर मौजूद थे उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लेकिन माहौल उस वक्त गमगीन हो गया जब शहीदों के परिवार के सदस्य और बेटियों ने श्रद्धांजलि देनी शुरू की।

जब हेलिकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हुए ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर की बेटी उस कॉफिन के पास पहुंची जिसमें उनके पिता थे। तो पहले वो कॉफिन के सामने पहुंचकर कुछ देर खड़ी रहीं। फिर वो झुकी और पिता के ताबूत को चूम लिया। इस दृश्य ने सभी की आंखों को नम कर दिया।

अब जनरल रावत और उनकी पत्नी के शवों का अंतिम संस्कार आज शाम किया जाएगा। इससे पहले दिल्ली के 3 कामराज मार्ग पर स्थित उनके सरकारी आवास पर शवों को अंतिम श्रद्धांजलि के लिए रखा जा रहा है। यहां सुबह 11 बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक नेता, अफसर और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। जबकि, दोपहर साढ़े बारह से डेढ़ बजे तक का वक्त सैन्य अधिकारियों और जवानों के लिए रखा गया है।

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सेना के सूत्रों के मुताबिक अभी तक के कार्यक्रम के अनुसार जनरल रावत और उनकी पत्नी के शव दोपहर 2 बजे आवास से सेना की गाड़ी में दिल्ली कैंट स्थित बरार स्क्वैयर श्मशान घाट ले जाए जाएंगे। जहां शाम 4 बजे के आसपास उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम संस्कार उनकी दोनों बेटियां करेंगी। जनरल रावत की एक बेटी दिल्ली हाईकोर्ट में वकील हैं। जबकि, दूसरी बेटी की शादी हो चुकी है और वो मुंबई में रहती हैं। वो भी हादसे के दिन दिल्ली में ही थीं। पालम एयरपोर्ट पर दोनों बेटियों ने अपने माता-पिता के शवों को गुरुवार रात श्रद्धांजलि भी दी।

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