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विजय दिवस पर संसद ने भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को याद किया

संसद के दोनों सदनों ने 50वें ‘विजय दिवस’ के मौके पर बृहस्पतिवार को भारतीय सेना के शौर्य एवं पराक्रम की सराहना की तथा शहीदों को नमन किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में बलिदान देने वाले भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों की वीरता और दृढ़ता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।

निचले सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के 50 वर्ष पूरे होने पर सैनिकों के शौर्य और पराक्रम की सराहना की और सदन की ओर से उन्हें नमन किया।

बिरला ने कहा, ‘‘आज देश स्वर्णिम विजय पर्व मना रहा है और इस अवसर पर हम बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों के साहस का भी स्मरण करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस अवसर पर हम जल-थल और वायु सेना के जवानों की वीरता को नमन करते हैं।’’ लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उनकी (सैनिकों की) वीरता और दृढ़ता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।’’ उन्होंने सदन की ओर से बांग्लादेश की जनता को भी बधाई दी ।

राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों ने 1971 में जिस अदम्य साहस का परिचय दिया उसे देश आज गर्व के साथ याद करता है।

उन्होंने कहा कि भारत के बांग्लादेश के साथ ही बहुत ही मित्रवत संबंध हैं और देश आगे भी इन अच्छे रिश्तों को और मजबूत करने का इरादा रखता है।

गौरतलब है कि 1971 में आज ही के दिन पूर्वी पाकिस्तान के चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर लेफ्टिनेंट जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी और पूर्वी पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी सैन्य बलों के कमांडर ने आत्मसमर्पण के पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

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