स्वास्थ्य

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ली अंगदान की शपथ, 8,000 लोगों को कराया अंगदान करने का संकल्प 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आगरा के जीआईसी ग्राउंड में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की उपस्थिति में अंगदान की शपथ ली।


डॉ. मांडविया  ने 23 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और 87 ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों की आधारशिला रखी। आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक का भी उद्घाटन। अंगदान रजिस्ट्री की शुरूआत। 8,000 लोगों ने अंगदान करने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य सेवाओं की परिपूर्णता कवरेज के लिए 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आगरा के जीआईसी ग्राउंड में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की उपस्थिति में अंगदान की शपथ दिलाई। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री वर्चुअली शामिल हुए। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय और उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पोषण मंत्री बेबी रानी मौर्य भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर आगरा में लगभग 8,000 लोगों ने अंगदान करने का संकल्प लिया।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि किसी और की जिंदगी बचाने के लिए अंग दान करने से बड़ी मानव सेवा कोई नहीं हो सकती। उन्होंने “जीवित रहने पर रक्त दान करने और मृत्यु के बाद अंग दान करने” का स्पष्ट आह्वान किया।

अंग प्रत्यारोपण के बाद नियमित दवाओं और जांच की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “सरकार ने अंग प्रत्यारोपण कराने वाले सभी गरीब लोगों को प्रति माह 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है।” उन्होंने आगे कहा, “उनके नियमित चेक-अप की भी व्यवस्था की जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि 2024 के अंत तक देश के सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ऑर्गन रिट्राइवल की व्यवस्था कर दी जाएगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में एक सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक और एक अंग दान रजिस्ट्री का भी उद्घाटन किया। अंग दान करने के लिए पंजीकरण करने के लिए, केवल आधार संख्या और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर ही आवश्यक है। उन्होंने उसी दिन आगरा में 23 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और 87 ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों की आधारशिला भी रखी।

डॉ. मांडविया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का निर्माण 7,890 वर्ग मीटर के क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। उन्होंने कहा कि एसएनएमसी में सुविधा न केवल आगरा बल्कि 11 जिलों और आसपास के दो राज्यों में लगभग 3 करोड़ लोगों को सेवा प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि एसएनएमसी में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी आदि सेवाएं शामिल होंगी।

डॉ. मांडविया  ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने स्वास्थ्य सेवा कार्यबल को बढ़ाने के साथ-साथ देश में स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे में सुधार और विस्तार के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल की हैं।

एक वीडियो संदेश के माध्यम से, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने हमेशा नागरिकों के स्वास्थ्य और भलाई को सर्वोच्च महत्व दिया है। अंग दान प्रतिज्ञा पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि “एक अंग दान करने से दूसरे व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है”। उन्होंने उपस्थित लोगों को अपने अंग दान करने का संकल्प लेने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि यह संदेश पूरे देश में गूंजे।

प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने लोगों के जीवन को बचाने में अंग दान के महत्व पर प्रकाश डाला। इस बात पर अफसोस जताते हुए कि देश में केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही अंग प्रत्यारोपण की सुविधा मिल पाती है, उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार के सदस्यों ने भी अपने अंग दान करने का संकल्प लिया है और सभी से ऐसा करने का आग्रह किया है।

इसके बाद आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की परिपूर्णता के लिए ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाया जाएगा जो 17 सितंबर से शुरू होकर  2 अक्टूबर, 2023 तक चलेगा। ‘आयुष्मान भव’ अभियान जिसका उद्घाटन 13 सितंबर, 2023 को माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया था, जिसका उद्देश्य पूरे देश में स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच और समावेशिता को फिर से परिभाषित करना है उसे पूरे देश और सम्पूर्ण समाज को ध्यान में रखकर ‘सेवा पखवाड़ा’ के दौरान लागू किया जाएगा। सेवा पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए हर गांव और कस्बे तक व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज का विस्तार करना है और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पीछे न छूटे।

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