उमाकांत त्रिपाठी। देश की पहली रैपिड रेल नमो भारत ने पटरियों पर दौड़ना शुरू कर दिया है ट्रेन शुरू होने के पहले दिन करीब 10 हजार लोग इसके आरामदायक सफर का लुत्फ भी उठा चुके हैं। आज हम आपको भारत की पहली सेमी-हाईस्पीड रीजनल रेल ‘नमो भारत’ के बारे में वो खास बातें बताएंगे जो शायद आपको अबतक पता ना हो। आईए जानते हैं इस ट्रेन का आपके घर के बने बर्तनों और देश की सबसे अमीर महिला से किस तरह का लिंक है।
जिससे बनते हैं बर्तन, उसी से बनी है ‘नमो भारत’
पिछले दिनों दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल के इस सेक्शन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को पूरा करता है। इस प्रोजेक्ट से भारत के रेलवे सेक्टर में क्रांति आने वाली है। आपको बता दें कि नमो भारत’ रैपिड रेल पूरी तरह स्टेनलैस स्टील से बनी है। इसे बनाने में 600 टन स्टेनलैस स्टील लगा है, इसी स्टेनलैस स्टील से आपके हमारे घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तन बनते हैं। इसे बनाने में वर्ल्ड क्लास 301 LN ग्रेड स्टेनलैस स्टील का इस्तेमाल हुआ है।
देश की सबसे अमीर महिला से भी है कनेक्शन
इसका लिंक देश की सबसे अमीर महिला से भी है। आपको बता दें कि इन ट्रेन को बनाने के लिए स्टील की सप्लाई जेएसडब्ल्यू स्टील ने की है। इसकी चेयरपर्सन सावित्री जिंदल देश की सबसे अमीर महिला हैं, जिंदल स्टेनलैस स्टील के एमडी अभ्युदय जिंदल के हवाले से फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने खबर दी है कि कंपनी को भारत सरकार के रेलवे विभाग के लिए काम करते हुए 25 साल पूरे हो गए हैं। ये हमारे लिए गर्व की बात है कि देश की पहली रैपिड रेल के लिए हमने स्टील की आपूर्ति की है। ‘नमो भारत’ रैपिड रेल पूरी तरह स्टेनलैस स्टील से बनी है। इसे बनाने में 600 टन स्टेनलैस स्टील लगा है।
ये फीचर्स बनाते हैं ‘नमो भारत’ को खास
‘नमो भारत’ को बनाने में वर्ल्ड क्लास 301 LN ग्रेड स्टेनलैस स्टील का इस्तेमाल हुआ है। इसकी दो फिनिश 2J और 2B का इस्तेमाल हुआ है। ‘नमो भारत’ की हर ट्रेन में 6 कोच लगे हैं, एलस्टॉम ने टोटल 11 ट्रेन का निर्माण किया है। इन 66 कोच में बाहर की दीवार से लेकर ट्रेन के कंपोनेंट जैसे कि ब्रैकेट्स, एंड वॉल, सोल बार, रूफ इत्यादि सभी स्टेनलैस स्टील से बना है। ‘नमो भारत’ को स्टेनलैस स्टील से बनाने की वजह इसका मजबूती के साथ-साथ वजन में हल्का होना भी है। हल्के वजन की वजह से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार भर सकती है. ये ट्रेन को काफी एनर्जी एफिशिएंट बनाता है।














