उमाकांत त्रिपाठी। गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो नए बिलों पर चर्चा की। आपको बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। आज सत्र का तीसरा दिन है। जम्मू और कश्मीर का भविष्य तय करने वाले बिलों पर चर्चा का जवाब देते हुए संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर जमकर हमला बोला। संबोधन में शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाना कुछ लोगों को खटक गया है। जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक अब लोकसभा में पास हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इसे कम आंकने की कोशिश की है। कुछ लोगों ने इसे सिर्फ ये समझा की नाम बदल रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि अगर इसे गौर से देखा जाए तो इसमें कुछ लोगों का नाम और सम्मान जुड़ा है।
जल्द ही कुछ बड़ा काम करेंगे- शाह
लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार कश्मीरियों के लिए जो कर रही है उसे इतिहास याद रखेगा। अब मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर पर अब 370 से आगे निकल चुकी है और जल्द ही कुछ और बड़ा काम काम होने जा रहा है। इस दौरान गृहमंत्री ने कहा कि- जो बिल मैं यहां लाया हूं वह उन लोगों को न्याय दिलाने और उनका अधिकार दिलाने से संबंधित है जिनके खिलाफ अन्याय हुआ, जिनका अपमान हुआ और जिनकी अनदेखी की गई। किसी भी समाज में जो वंचित हैं, उन्हें आगे लाना चाहिए। इस दौरान लोकसभा में अमित शाह के पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू को लेकर दिए गए बयान पर भी काफी हंगामा हुआ। गृह मंत्री ने कहा कि- नेहरू ने कश्मीर को लेकर सिर्फ गलतियां नहीं की बल्कि ब्लंडर किए हैं। नेहरू की वजह से ही पीओके बना है। सेना जीत वाली थी पर नेहरू ने कश्मीर जीते बिना ही सीजफायर का ऐलान किया।
पीएम मोदी जानते हैं पिछड़ों का दर्द
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नाम के साथ सम्मान जुड़ा है, इसे वही लोग देख पाते हैं, जो अपने से पीछे रह गए लोगों की अंगुली पकड़ कर संवेदना के साथ उन्हें आगे बढ़ाना चाहते हैं। वो लोग इसे नहीं समझ सकते, जो इसका उपयोग वोटबैंक के लिए करते हैं। नरेन्द्र मोदी ऐसे नेता हैं, जो गरीब घर में जन्म लेकर देश के प्रधानमंत्री बने हैं, वह पिछड़ों और गरीबों का दर्द जानते हैं। पहले जम्मू में 37 सीटें थीं, अब 43 हैं। कश्मीर में पहले 46 थीं, अब 47 हैं और PoK में 24 सीटें आरक्षित कर दी गई हैं क्योंकि PoK हमारा है। शाह ने आगे कहा कि- पाकिस्तान ने 1947 में कश्मीर पर हमला किया जिसमें लगभग 31,789 परिवार विस्थापित हुए…1965 और 1971 के युद्धों के दौरान 10,065 परिवार विस्थापित हुए। 1947, 1965 और 1969 के इन तीन युद्धों के दौरान कुल 41,844 परिवार विस्थापित हुए। यह यह बिल उन लोगों को अधिकार देने की कोशिश है।














