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सिर्फ 77 लाख आबादी वाले देश में क्यों पहुंचे पीएम मोदी, इस वजह से अहम है पीएम का लाओस दौरा

उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय लाओस दौरे के लिए राजधानी वियनतियाने पहुंच चुके हैं. प्रधानमंत्री यहां 21वें आसियान-भारत समिट और 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. लाओस की राजधानी वियनतियाने में समिट का आयोजन किया जाएगा. इस साल लाओस आसियान सम्मेलन का मेजबान और वर्तमान अध्यक्ष है.
पीएम मोदी ने लाओस रवाना होने से पहले सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर इसे एक खास मौका बताया है. पीएम ने लिखा है कि, ‘यह एक विशेष वर्ष है, क्योंकि हम अपनी एक्ट ईस्ट नीति के एक दशक का जश्न मना रहे हैं, जिससे भारत को लाभ हुआ है.

भारत के लिए क्यों अहम है लाओस?
लाओस वैसे तो एक छोटा सा देश है लेकिन इसकी भौगोलिक स्थिति के चलते यह भारत के लिए रणनीतिक और व्यापारिक तौर पर काफी अहम माना जाता है. इसकी सीमा चीन और म्यांमार से लगती है, लिहाजा चीन और म्यांमार से घिरे होने के कारण यह देश रणनीतिक तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. यह भारत के इंडो-पैसिफिक विजन का महत्वपूर्ण स्तंभ है, साथ ही साउथ चाइना सी में चीन के बढ़ते दखल के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है. व्यापारिक नजरिए की बात करें तो दक्षिण पूर्व एशिया में लाओस की भौगोलिक स्थिति के कारण भी यह हमेशा से अहम रहा है.

नेहरू भी जा चुके हैं लाओस
भारत के लिए लाओस कितना अहम है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में और पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने 1959 में ही लाओस का दौरा किया था. लाओस को फ्रांस के कब्जे से मुक्ति दिलाने में भी भारत ने इंटरनेशनल कमीशन फॉर सुपरविजन एंड कंट्रोल (ICSC) के चेयरमैन के तौर पर अहम भूमिका निभाई थी. जुलाई 1954 में जेनेवा संधि के आधार पर ICSC की स्थापना की गई थी, इसका उद्देश्य भारत-चीन के बीच दुश्मनी को खत्म करने और लाओस से फ्रांसिसी उपनिवेशवादी शक्तियों की वापसी कराना था.

दोनों देशों के बीच है मजबूत संबंध
भारत और लाओस के बीच दशकों पुराने मजबूत संबंध रहे हैं. दोनों देशों के बीच 1956 में डिप्लोमैटिक संबंध स्थापित हुए. तब से अब तक दोनों देशों की ओर से द्विपक्षीय यात्राएं होती रहीं हैं. भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में ही लाओस का दौरा किया था. इसके बाद 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी ने लाओस की आधिकारिक यात्रा की थी. 2004 में मनमोहन सिंह और 2016 में प्रधानमंत्री मोदी आसियान-भारत समिट में हिस्सा लेने के लिए लाओस का दौरा कर चुके हैं.

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