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संसद का शीतकालीन सत्र: हंगामे के बाद स्थगित हुई राज्यसभा, लोकसभा की कार्यवाही भी हुई स्थगित

उमाकांत त्रिपाठी।Parliament Session 2024: संसद के शीतकालीन सत्र का आज से आगाज हो गया है। 25 नवंबर से 20 दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में विचार के लिए लिए वक्फ (संशोधन) विधेयक सहित 16 विधेयकों की सूची तैयार की है। इस सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने की कोशिश भी करेगी। शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक भी हुई। जिसमें विपक्ष की तरफ से मणिपुर हिंसा और प्रदूषण समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग की।

लोकसभा की कार्रवाही 27 नवंबर सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित
संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार 25 नवंबर से शुरू हो गया। हालांक‍ि हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही 27 नवंबर 11 बजे द‍िन तक के ल‍िए स्‍थग‍ित कर दी गई। इसके पहले सोमवार 11 बजे संसद के शीतकालीन सत्र का शुभारंभ क‍िया गया था।

विपक्ष के हंगामे के बाद राज्यसभा पूरे दिन के लिए हुई स्थगित
राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। मंगलवार को संविधान दिवस के कारण सदन की कार्यवाही नहीं होगी। अब बुधवार को सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होगी। सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही 11.45 बजे शुरू हुई थी।

दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित हुई लोकसभा
विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी है।

पीएम मोदी ने बताया कि संसद से क्या संदेश जाना चाहिए
पीएम मोदी ने आगे कहा कि- भारत की संसद से भी वो संदेश जाना चाहिए कि भारत के मतदाता उनका लोकतंत्र के प्रति समर्पण, उनका संविधान के प्रति समर्पण, संसदीय कार्यपद्धति पर विश्वास, संसद में बैठे हुए हम सबको जनता जनार्दन की भावनाओं पर खरा उतरना ही पड़ेगा। हम अबतक जितना समय गंवा चुके हैं उसका थोड़ा पश्चाताप करें, हम बहुत ही तंदुरुस्त तरीके से हर विषय के अनेक पहलुओं को संसद भवन में हम उजागर करें, आने वाली पीढ़िया भी पढ़ेगी उसको, उससे प्रेरणा लेगी। मैं आशा करता हूं कि ये सत्र बहुत ही परिणामकारी हो। संविधान के 75वें वर्ष की शान को बढ़ाने वाला है, भारत की वैश्विक गरिमा को बल देने वाला हो, नए सांसदों को अवसर देने वाला हो, नए विचारों का स्वागत करने वाला हो। इसी भावना के साथ उमंग और उत्साह के साथ इस सत्र को आगे बढ़ाने के लिए निमंत्रित करता हूं, स्वागत करता हूं।

लोकतंत्र की शर्त है जनता जर्नादन के व्यवहार का आदर करें- पीएम मोदी
2024 को चुनाव के बाद देश की जनता को अपने अपने राज्यों में अपनी भावना प्रकट करने का अवसर मिला है, उसमें भी 2024 के लोकसभा के चुनाव के नतीजों को और अधिक ताकत दी गई है, राज्यों के द्वारा और अधिक समर्थन बढ़ा है और लोकतंत्र की शर्त है कि हम जनता जर्नादन के व्यवहार का आदर करें। मैं बार-बार खासकर विपक्ष के साथियों से आग्रह करता रहा हूं और कुछ विपक्ष बहुत जिम्मेदारी से व्यवहार करते भी हैं। उनकी भी इच्छा रहती है कि सदन में सुचारू रूप से काम हो लेकिन लगातार जिनको जनता ने नकार दिया है, वे अपने साथियों की बात को भी दबोच लेते हैं, उनकी भावनाओं का भी अनादर करते हैं। मैं आशा करता हूं कि हमारे नए साथियों को अवसर मिले, सभी दल में नए साथी हैं. उनके पास नए विचार हैं, भारत को आगे ले जाने के लिए नई-नई कल्पनाएं हैं और आज विश्व भारत की तरफ बहुत आशा भरी नजर से देख रहा है तब हम संसद का समय का उपयोग वैश्विक स्तर पर भी भारत का जो आज सम्मान बढ़ा है, भारत के प्रति जो आकर्षण बढ़ा है।

जनता कर रही बार-बार उनको रिजेक्ट- पीएम मोदी
लोकतांत्रिक परंपरा में हर पीढ़ी का काम है कि आने वाली पीढ़ियों को तैयार करें लेकिन 80-90 बार जनता ने जिनको लगातार नकार दिया है, वे न तो संसद में चर्चा होने देते हैं और न लोकतंत्र की भावना का सम्मान करते हैं न ही वो लोगों की आकांक्षाओं का वो महत्व समझते हैं, न उनका कोई दायित्व समझ पाते हैं, उसका परिणाम हैं कि वो जनता की उम्मीदों पर कभी भी खड़े नहीं उतरते हैं। परिणाम जनता उनको बार-बार रिजेक्ट कर रही है।

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