खबर इंडिया की। बिहार में BPSC शिक्षिका गुंजन कुमारी और उनके पति अमन कुमार के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। पति-पत्नी के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब उनके 10 वर्षीय बेटे के बयान ने पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक यह मामला लगातार सुर्खियां बटोर रहा है।

बच्चे ने दावा किया है कि जब उसकी मां सुपौल में नौकरी कर रही थीं, तब एक व्यक्ति अक्सर उनके घर आया करता था। बच्चे के अनुसार, वह व्यक्ति कई दिनों तक घर पर रुकता था और उसकी मां उससे घंटों फोन पर बातचीत करती थीं। बच्चे ने कहा कि उसे कई बार एक ही कमरे में सोना पड़ता था और वह इन घटनाओं को लेकर असहज महसूस करता था।
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वहीं दूसरी ओर पति अमन कुमार का आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी की पढ़ाई और करियर के लिए हर संभव सहयोग किया। अमन का कहना है कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने जमीन बेचकर पत्नी की पढ़ाई जारी रखवाई। उनके अनुसार, BPSC में चयन होने के बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया और दोनों के बीच दूरी बढ़ने लगी।
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अमन का दावा है कि वर्ष 2024 के दौरान उनकी पत्नी की मुलाकात एक पुराने परिचित से हुई, जिसके बाद दोनों के संबंधों को लेकर उन्हें शक होने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस बारे में सवाल उठाए तो पत्नी ने उनके साथ रहने से इनकार कर दिया। बाद में मामला इतना बढ़ गया कि दोनों अलग-अलग रहने लगे और विवाद न्यायालय तक पहुंच गया।

दूसरी तरफ शिक्षिका गुंजन कुमारी ने पति के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय तक वैवाहिक जीवन में पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति का एक अन्य महिला से लगाव था, जिसके कारण परिवार में तनाव बढ़ा। गुंजन का कहना है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखी, बच्चे की देखभाल की और मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी हासिल की।

गुंजन ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। दार्जिलिंग यात्रा और अन्य घटनाओं को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे वास्तविकता से मेल नहीं खातीं। उनके अनुसार, वे अपनी सहकर्मियों के साथ यात्रा पर गई थीं और उस दौरान लगातार परिवार के संपर्क में थीं।

इस पूरे विवाद में सबसे संवेदनशील पहलू बच्चे का बयान बन गया है। बच्चे ने पिता के साथ रहने की इच्छा जताई है और मां के साथ जाने से इनकार किया है। हालांकि पारिवारिक मामलों में बच्चों के बयान और परिस्थितियों का मूल्यांकन अदालत और संबंधित संस्थाएं कानूनी प्रक्रिया के तहत करती हैं।

फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। मामला परिवार न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा। अभी तक किसी भी आरोप की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग पति के पक्ष में अपनी राय दे रहे हैं, जबकि कई लोग शिक्षिका के दावों को भी गंभीरता से देखने की बात कर रहे हैं। ऐसे में सच क्या है, इसका अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल सभी की नजरें अदालत की सुनवाई और आगे आने वाले तथ्यों पर टिकी हुई हैं।














