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यूपी निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जा सकती है सरकार

योगी को ठाकुरों का नेता कहने वालों चुल्लु भर पानी में डुब जाओ… योगी सिर्फ ठाकुरों के नेता नहीं है… वो मुस्लिमों के भी नेता है… वो पिछड़ों के भी नेता है… वो दलितों के भी नेता है… वो पूरे उत्तर प्रदेश के जन-जन के नेता है… पहले मुस्लिमों के लिए मदरसों में संडे की छुट्टी और समान ड्रेस लागू करने पर चर्चा की अब पिछड़ों के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा करके सीएम योगी ने करोड़ों पिछड़ों का दिल जीत लिया है…

गौरतलब है कि यूपी नगर निकाय चुनाव के लिए सरकार ने जो ओबीसी आरक्षण दिया था उसे इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने रद्द कर दिया है… फैसला आते ही योगी ने कहा कि सरकार पहले अन्य पिछड़ा वर्ग के नागरिकों को आरक्षण दिलाएगी उसके बाद ही निकाय चुनाव कराएगी…

यूपी सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव कराने के लिए 5 दिसंबर को अधिसूचना जारी की थी जिसमें ओबीसी को सभी पदों पर 27 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया था… जिसपर आपत्ति जताते हुए कई लोगों ने हाइकोर्ट में पिटीशन दायर कर दिया… निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कुल 93 पिटीशनों के सुनवाई करने के बाद 87 पेज में दिए अपने आर्डर में हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने 5 दिसंबर को निकाय चुनाव को लेकर जो आरक्षण सूची जारी की थी… उसे रद्द की जाती है और 12 दिसंबर को सरकार की ओर से जो प्रशासक नियुक्त किए गए थे… उसे भी रद्द किया जाता है… यानी यूपी सरकार के दो फैसलों पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है…

वहीं, यूपी के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने कहा, ‘बिना ओबीसी आरक्षण यूपी में निकाय चुनाव नहीं होने देंगे, अगर जरूरत पड़ी तो हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे, प्रदेश की योगी सरकार ओबीसी आरक्षण के पक्ष में है…

जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सौरभ लवानिया की बेंच ने ये भी कहा है कि जब तक ट्रिपल टेस्ट न हो, तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा, सरकार या निर्वाचन आयोग बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करवा सकता है…

योगी आदित्यनाथ के इस फैसले ने साबित कर दिया है कि योगी के रहते यूपी में किसी का हक नहीं छीना जाएगा… हर किसी के हक के लिए योगी आदित्यनाथ हमेशा खड़े रहते हैं…

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