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बड़ी मुश्किल आए या खुशियों के पल हो, सबसे पहले किसे फोन करेंगे पीएम मोदी, अपने पहले पॉडकास्ट में दिया ये जवाब

उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले पॉडकास्ट में अपनी जिंदगी से जुड़े कई अनछुए पहलुओं पर बातचीत की। जीरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने अपने पॉडकास्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि जब उन्हें कुछ अहम बातें शेयर करने की जरूरत होती है तो वह किसे कॉल करते हैं। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि वह सबसे पहले अपनी मां को फोन करते।

लाल चौक पर झंडा फहराना चुनौतीपूर्ण था-पीएम
पीएम मोदी ने पॉडकास्ट में कहा,कि- मैं तिरंगा फहराने के लिए श्रीनगर के लाल चौक गया था। इससे पहले पंजाब में पघवाड़ा के पास हमारी यात्रा पर हमला हुआ, गोलियां चलीं, कई लोग घायल हुए, करीब 5-6 लोग मारे गए और पूरे देश में तनाव का माहौल था। उस समय लाल चौक पर झंडा फहराना चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वहां अक्सर झंडा जला दिया जाता था। तिरंगा फहराने के बाद हम जम्मू आए। तो जम्मू से मेरा पहला फोन मेरी मां को था। मेरे लिए यह खुशी का पल था और मुझे यह भी लगा कि उन्हें चिंता हो रही होगी कि मैं ऐसी जगह गया हूं जहां इतनी गोलियां चल रही हैं। मुझे याद है कि मेरा पहला फोन मेरी मां को था। आज मैं उस फोन का महत्व समझता हूं। उसके बाद से मुझे ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ।

मां के निधन के बाद कैसा महसूस हुआ था-पीएम मोदी
अपने पिता के निधन के बाद का अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए कामथ ने कहा कि उन्हें अपने पिता के साथ ज़्यादा समय न बिता पाने का दुख है। उन्होंने पीएम मोदी से पूछा कि- क्या उन्हें भी अपनी मां के निधन के बाद ऐसा ही महसूस हुआ था। पीएम ने जवाब देते हुए कहा,कि- ‘देखिए, मेरी जिंदगी बहुत अलग थी। मैंने बचपन में ही अपना घर छोड़ दिया था। यहां तक ​​कि मेरे परिवार ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया था कि मैं वहां का नहीं हूं। मैंने भी स्वीकार कर लिया था कि मैं पारिवारिक जीवन के लिए नहीं बना हूं। इसलिए, मेरी जिंदगी ऐसी ही रही है। इसलिए, हम दोनों के बीच कभी भी इस तरह का लगाव नहीं रहा।’

मेरी मां पढ़ी-लिखी नहीं थीं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा,कि- ‘जब मेरी मां 100 साल की हुईं, तो मैं उनका आशीर्वाद लेने गया। मेरी मां पढ़ी लिखी नहीं थीं, उन्होंने औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी। मैंने उनसे कहा कि- मैं अपने काम के लिए जा रहा हूं और पूछा कि क्या उनके पास मेरे लिए कुछ है। मैं उनके जवाब से हैरान था। मेरी मां, जो कभी स्कूल नहीं गईं थीं, ने दो वाक्य कहे: बुद्धि से काम करो, पवित्रता से जियो। मैंने तब से उनके शब्दों को संजो कर रखा है। इससे मुझे लगा कि भगवान ने मेरी मां को सब कुछ दिया होगा। अगर मैं उनके साथ रहता, तो मैं ऐसी और चीजें सीख पाता। इसलिए, मुझे उनकी याद आती है।

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