उमाकांत त्रिपाठी।मंगलवार, 5 अगस्त 2025 अमित शाह के लिए कई मायनों में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. एक तो 6 साल 64 दिन गृहमंत्री पद पर रहे लालकृष्ण आडवाणी का रिकॉर्ड तोड़कर अमित शाह सबसे लंबे अरसे तक इस पद पर बने रहने का रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं. दूसरे, यह भी चर्चा है कि जल्द ही मोदी सरकार जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने जा रही है. यदि ऐसा हुआ, तो इसकी घोषणा भी अमित शाह ही करेंगे, जैसा कि उन्होंने 5 अगस्त 2019 को धारा 370 खत्म किये जाने की घोषणा करते समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया था.
दरअसल, रविवार को पीएम मोदी और अमित शाह दोनों ही ने राष्ट्रपति मुर्मू से अलग अलग मुलाकात की थी. दूसरे कल 5 अगस्त है. 5 अगस्त 2019 को ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करके जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गयाथा. मंगलवार को यानि कि कल 5 अगस्त है. ऐसे में अमित शाह और राष्ट्रपति के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. एक बड़ी वजह यह है कि ऐसी मुलाकातें आमतौर पर तो बिल्कुल नहीं होती हैं. एक ही दिन और कुछ घंटे के अंतर से इन दोनों नेताओं का राष्ट्रपति से मिलना सामान्य नहीं है. सवाल उठता है कि क्या सरकार संसद में कोई बड़ा बिल लाने वाली है, जिसे लेकर राष्ट्रपति को जानकारी देने के लिए पीएम मोदी और गृहमंत्री पहुंचे हों. यही कारण है कि बहुत से कयास लगाए जा रहे हैं.
क्यों चर्चा है जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की?
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की चर्चा 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद से चल रही है. जब से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाकर दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया. तब से लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग स्थानीय नेताओं, दलों द्वारा की जा रही है. गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में संसद में वादा किया था कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. उसके बाद भारत सरकार भी कई बार बोल चुकी है कि वह समय आने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने भी 2023 में राज्य का दर्जा बहाली का आदेश दिया था.
दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश के रूप में, जम्मू-कश्मीर की सरकार के पास सीमित शक्तियां हैं. पुलिस, कानून-व्यवस्था, और अखिल भारतीय सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उपराज्यपाल और केंद्र सरकार का नियंत्रण है. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), और कांग्रेस जैसे दल लगातार पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करते रहे हैं. NC के नेता उमर अब्दुल्ला ने इसे अपनी सरकार का प्रमुख एजेंडा बनाकर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में 42 सीटें जीत ली.
पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 में संशोधन जरूरी है, जिसके लिए लोकसभा और राज्यसभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अंतिम स्वीकृति चाहिए होगी. उनकी मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी होने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा. रविवार को राष्ट्रपति की पीएम और गृहमंत्री से अलग अलग मुलाकात से यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं ये मुलाकात जम्मू कश्मीर के लिए तो नहीं है. बहुत संभावना है कि कल अनुच्छेद 370 के रद्द होने के छठें साल पर सरकार जम्मू कश्मीर की जनता को राज्य दर्जे की बहाली का ऐलान करे.
जम्मू और कश्मीर को अलग अलग राज्य बनाने की अफवाह
जम्मू क्षेत्र हिंदू बहुल होने और कश्मीर घाटी के मुस्लिम बहुल होने के चलते अक्सर इस बात पर चर्चा होती रही है कि क्या दोनों को अलग राज्य का दर्जा देना संभव है.जम्मू के लोग यह शिकायत करते रहे हैं कि कश्मीरी नेतृत्व ने उनके क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज किया और उन्हें सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया. इस संदर्भ में, जम्मू को अलग राज्य बनाने की मांग को कुछ लोग क्षेत्रीय सशक्तिकरण के रूप में देखते हैं.













