उमाकांत त्रिपाठी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में आए तमाम सुधारों में आर्थिक सुधारों का हिस्सा प्रमुख है. इसी का परिणाम है कि ऐसे समय में जब दुनिया असमानता और अनिश्चितता से जूझ रही है, वैसे समय में भारत ने लगातार आर्थिक विकास किया है. पीएम मोदी ने जब 2014 में सत्ता संभाली थी तो भारत के जीडीपी की विकास दर 6-7 फीसदी के आसपास थी. लेकिन मोदी सरकार में उठाए गए कदमों का असर था कि भारत अर्थव्यवस्था में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनते हुए 2015-16 में 7.4 फीसदी की विकास दर दर्ज की गई. साल 2014 में भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. यह 2025 में जापान को पछाड़ कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है. पीएम मोदी चाहते हैं कि विकास हर भारतीय तक पहुंचना चाहिए, खासकर उन लोगों तक जो अबतक विकास से वंचित रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ का नारा दिया गया था. मोदी सरकार इसी नारे को जमीन पर उतारने का प्रयास कर रही है.
महंगाई पर लगाई लगाम
साल 2013 में भारत की खुदरा महंगाई दर 10.02 फीसदी थी. इससे गरीब महंगाई की मार में पिस रहे थे. सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिशें शुरू कीं. यह मेहनत रंग लाई है, पिछले 11 सालों में तमाम तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. इस साल अगस्त में खुदरा महंगाई दर 3.65 फीसदी दर्ज की गई थी. पीएम मोदी ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए कई संकटों से अर्थव्यवस्था को निकाला. इस दौरान गरीबी में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. साल 2011-12 में 53.6 फीसदी लोग उच्च गरीबी रेखा के नीचे थे, जो 2022-23 में घटकर 16.4 फीसदी ही रह गए. वहीं अत्यधिक गरीबी 12.2 फीसदी से घटकर 2.2 फीसदी हो गई. गरीबी में आया यह बदलाव कल्याण योजनाओं, ग्रामीण विकास और रोजगार पैदा करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का परिणाम है.
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत
साल 2016 में नोटबंदी और 2017 में जीएसटी लागू होने से अर्थव्यवस्था कुछ समय के लिए सुस्त हुई. इससे 2019-20 में जीडीपी विकास दर 3.1 फीसदी तक गिर गई. इसके अलावा कोविड-19 महामारी ने भी 2020-21 में अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, लेकिन इसके बाद 2022-23 में भारत की जीडीपी विकास दर 7.6 फीसदी तक देखी गई. 2014 की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था. लेकिन 2025 में यह जापान को पछाड़ कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. पीएम मोदी ने 2025 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह लक्ष्य 2029 तक ही हासिल किया जा सकता है.
जीएसटी ने कर प्रणाली को बनाया आसान
मोदी सरकार ने एक जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया था. इसने पूरे देश को एक समान टैक्स के दायरे में ला दिया था. इससे टैक्स चोरी पर अंकुश लगा और सरकार की आय बढ़ी. साथ ही व्यापार करने में आसानी हुई क्योंकि अलग-अलग राज्यों के अलग टैक्स सिस्टम खत्म हो गए. जीएसटी सबसे बड़े टैक्स सुधारों में से एक है. इसने अर्थव्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाया है. चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही के पहले महीने अप्रैल में जीएसटी संग्रह 2.37 लाख करोड़ रुपये था. यह अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा कर संग्रह था. लेकिन यह जो मई में घटकर 2.01 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह जुलाई में और गिरकर 1.96 लाख करोड़ रुपये हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 फीसदी के टैरिफ का मुकाबला करने के लिए सरकार ने बीते हफ्ते जीएसटी में बदलाव किया. इस सुधार का भी असर इस महीने से दिखाई देने लगेगा. इससे महंगाई दर और कम होने का अनुमान है. इस कदम को भी मोदी सरकार का क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.
विरासत के संरक्षण से जुड़ी अर्थव्यवस्था को रफ्तार
मोदी की सरकार में विरासत के संरक्षण और विकास की दिशा में बड़े कदम उठाए गए. इसका एक बड़ा उदाहरण है पीएम के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में विकसित किया गया काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर. यह विरासत को विकास को जोड़ने का शानदार उदाहरण है. काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर केवल एक सौंदर्यीकरण परियोजना नहीं है, बल्कि इससे आस्था के साथ आर्थिक विकास को भी बल मिला. इससे वाराणसी में पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आया. इसका असर शहर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा. इस कॉरिडोर का लाभ काशी के मल्लाहों, पुजारियों, होटल मालिकों, दुकानदारों, रिक्शा चालकों, ऑटो चालकों और कारीगरों को मिला. इसके अलावा बनारसी साड़ी, मीनाकारी और हस्तशिल्प के अन्य उत्पादों की बिक्री में भी इसका असर दर्ज किया गया. कुछ इसी तरह का असर महाकाल की नगरी के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी देखने को मिला. वहां भी सरकार की पहल पर महाकाल कॉरीडोर बनाया गया. इसने शहर के विकास को एक नई धार दी है.














